"तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा"

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर विशेष 



सुभाष चंद्र बोस के मन में देश प्रेम स्वाभिमान और साहस की भावना बचपन से ही बड़ी प्रबल थी। वे अंग्रेज शासन का विरोध करने के लिए अपने भारतीय सहपाठियों का भी मनोबल बढ़ते थे। अपनी छोटी आयु में ही सुभाष ने यह जान लिया था, कि जब तक सभी भारतवासी एकजुट होकर अंग्रेजों का विरोध नहीं करेंगे, तब तक हमारे देश को उनकी गुलामी से मुक्ति नहीं मिल सकेगी, जहां सुभाष के मन में अंग्रेजों के प्रति तीव्र घृणा थी , वही अपने देशवासियों के प्रति उनके मन में बड़ा प्रेम था।

               किसी राष्ट्र के लिए स्वाधीनता सर्वोपरि है, इस महान मूल मंत्र को शैशव और नव युवाओं की नसों में प्रवाहित करने, तरूणो की सोई आत्मा को जगाकर देशव्यापी आंदोलन देने और युवा वर्ग की शौर्य शक्ति उद्बासित कर राष्ट्र के युवकों के लिए आजादी की आत्मप्रतिष्ठा का प्रश्न बना देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने स्वाधीनता महासंग्राम के महायज्ञ में प्रमुख पुरोहित की भूमिका निभाई।


भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अनेक महापुरुषों ने अपना योगदान दिया था, जिनमें ्नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम पहली पंक्ति में है, सुभाष चंद्र बोस ने भारत के लिए पूर्ण स्वराज का सपना देखा था। भारत को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के लिए उन्होंने कई आंदोलन किए और इसकी वजह से नेताजी को कई बार जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने अपने वीरतापूर्ण कार्यों से अंग्रेजी सरकार की नींव को हिलाकर रख दिया था। जब तक नेताजी रहे, तब तक अंग्रेजी हुक्मरान चैन की नींद नहीं सो पाए। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद सरकार ने हर क्षेत्र से जुड़ी योजनाएं बनाई थी, इस सरकार का अपना बैंक था, अपनी मुद्रा थी, अपना डाक टिकट था, अपना गुप्तचर तंत्र था, नेताजी ने देश के बाहर रहकर सीमित संसाधनों के साथ शक्तिशाली साम्राज्य के खिलाफ व्यापक तंत्र विकसित किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने बैंक को स्वाधीन भारत के लिए अपनी मुद्रा के निर्माण के आदेश दिए, आजाद हिंद सरकार की अपनी बैंक थी, जिसका नाम आजाद हिंद बैंक था, आजाद हिंद बैंक ने दस रुपये के सिक्के से लेकर एक लाख रुपये का नोट जारी किया था। एक लाख रुपये के नोट पर सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर छपी थी , सुभाष चंद्र बोस ने जापान और जर्मनी की मदद से आजाद हिंद सरकार के लिए नोट छपवाने का इंतजाम किया था। जर्मनी ने आजाद हिंद सरकार के लिए कई डाक टिकट जारी किए थे जिन्हें आजाद डाक टिकट कहा जाता था। ये टिकट आज भारतीय डाक के स्वतंत्रता संग्राम डाक टिकटों में शामिल है ।आजाद हिंद सरकार सशक्त क्रांति का अभूतपूर्व उदाहरण था ।नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजी हुकूमत यानी एक ऐसी सरकार के खिलाफ लोगों को एकजुट किया, जिसका सूरज कभी अस्त नहीं होता था, दुनिया के एक बड़े हिस्से में जिसेका शासन था।

                    आजाद हिंद सरकार ने राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगा को चुना था, रविंद्र नाथ टैगोर रचित "जन- गण-मन" को राष्ट्रगान बनाया था, एक दूसरे से अभिवादन के लिए जय हिंद का प्रयोग करने की परंपरा शुरू की गई थी। नेताजी का नारी सशक्तीकरण के प्रबल पक्षधर थे, कारण कहते थे, की नारी सन्तान पालन करने के रूप में मानव जाति के निर्माण में प्रथम है। और परिवार में संस्कार तथा घर को मंदिर बनाना तथा हमारी सांस्कृतिक परंपरा को बनाये रखने में केवल नारी का ही योगदान है, मां अन्नपूर्णा के रूप में भोजन प्रसाद बनाना तथा अपने परिवार को खिलाना उसका प्रमुख रूप देवी मां जगत जननी के रूप में स्थापित करती है। तथा नई पूजन करने से देवता का वास होता है, यह पूरे बंगाल नहीं पूरे भारत में इसको प्रचारित करना है, तथा विश्व के पटल पर ले जाना है।

                   " नेताजी " के नाम से लोकप्रिय सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक अप्रतिम नेता और असाधारण क्रांतिवीर थे। वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को प्रभावी रूप से देश की सीमाओं से बाहर ले गए, जोकि हमारे स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में संभवत: एक विलक्षण कार्य था। उनका जय हिन्द का करिश्माई और प्रेरणादायी नारा जो आज तक हमारे कानों में गूंजकर हृदय में देशप्रेम की लहरें पैदा करता है, वास्तव में राष्ट्रीय एकता की पहचान बन गया  है।


नेताजी के लिए स्वाधीनता 'जीवन मरण' का प्रश्न बन गया था। बस यही श्रद्धा यही आत्मविश्वास जिसमें ध्वनित हो वही व्यक्ति वास्तविक सृजक है। नेताजी ने पूर्ण स्वाधीनता को राष्ट्र के युवाओं के सामने एक मिशन के रूप में प्रस्तुत किया। नेताजी ने युवाओं से आह्वान किया कि जो इस मिशन में आस्था रखता है वह सच्चा भारतवासी है। बस उनके इसी आह्वान पर ध्वजा उठाए आजादी के दीवानों की आजाद हिंद फौज बन गई। उन्होंने अपने भाषण में कहा था विचार व्यक्ति को कार्य करने के लिए धरातल प्रदान करता है। उन्नतिशील, शक्तिशाली,जाति और पीढ़ी की उत्पत्ति के लिए हमें बेहतर विचार वाले पथ का अवलंबन करना होगा, क्योंकि जब विचार महान साहसपूर्ण और राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत होंगे होंगे ,तभी हमारा संदेश अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी।


"संघर्ष ने मुझे मनुष्य बनाया, मुझमें आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ, जो पहले मुझ में नहीं था।"


"मुझे जीवन में एक निश्चित लक्ष्य को पूरा करना है , मेरा जन्म उसी के लिए हुआ है,मुझे नैतिक विचारों की धारा में नहीं बहना है।"


"उच्च विचारों से कमजोरिया दूर होती है,हमें हमेशा उच्च विचार पैदा करते रहना चाहिए।"

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