आत्मा सिद्धि कर स्वंय का जीवन श्रेष्ठ बना सकते हैं: राजयोगिनी प्रवेश बहन




 फरीद अंसारी

जानसठ। कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चल रही श्रीमद भगवत कथा के छठे दिन श्री लक्ष्मी नारायण स्वयंवर का चित्रण प्रस्तुत किया गया। ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी प्रवेश बहन ने बताया कि नर ऐसी करनी करें जो नर श्री नारायण बने। नारी श्री लक्ष्मी बने वह करनी है देवी कुंड व्यवहार। गृहस्थ मुखिया स्वर का सम्मान, सबका सहयोग, विश्व कल्याण की भावना, मन वचन कर्म से एक बने तभी समाज के अंदर एकता होगी। भाईचारा होगा। समाज का उत्थान, लक्ष्मीनरायण की पदवी, मान सम्मान की भावना, बराबर का दर्जा, सदा संतुष्ट व भरपूर स्वत्व प्रधान आत्मा की स्टेज दिखाई गई है। हम आत्मा सिद्धि कर स्वयं का जीवन श्रेष्ठ बना सकते हैं। यही जीवन का लक्ष्य है। इस दौरान मुख्य रूप से श्रीमद् भागवत कथा में राकेश, सोमपाल, मुनेश, ईश्वर शरण वालिया, रानी,अमित,राजेंद्र, शिल्पी, लक्ष्मी, परी, सुनीता शर्मा, पूजा,राजकुमारी,बबीता, विमलेश, कोमल, कौशल्या, उर्मिला,अनीता,रजनी गुप्ता आदि उपस्थित रहे। इस दौरान राजयोगिनी प्रवेश बहन ने बताया कि बृहस्पतिवार को श्रीमद् भागवत कथा का समापन होगा। इस दौरान प्रातः काल 9:00 यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर यज्ञ में अपनी आहुति देकर अपने जीवन को सफल एवं पवित्र बनाएं।

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