कहानी खतौली उपचुनाव की......


                                             जीत का जश्न (फाइल फोटो)

(अनस बघरा)

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और कई बार के विधायक मंत्री मोहम्मद आजम खान को हेट स्पीच मामले में 3 साल की सजा होने के बाद आनन-फानन में आज़म खान को चुनाव आयोग द्वारा अयोग्य और रामपुर सीट को विधानसभा द्वारा रिक्त घोषित कर दिया गया, जिसके बाद राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद जयंत सिंह ने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को एक पत्र लिखा और उसको सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया जिसके बाद खतौली सीट खाली होने की चर्चा शुरू हो गई आपको बता दें, विधायक विक्रम सैनी 2022 के विधानसभा चुनाव में विक्रम सैनी खतौली से ही विधायक चुने गये थे और उन्होने अपने सजातीय गठबंधन प्रत्याशी पूर्व राज्यसभा सांसद विधायक मंत्री राजपाल सैनी को 16 हज़ार से ज्यादा वोटो से हराया था विक्रम सैनी को मोहम्मद आजम खान से पहले ही मुजफ्फरनगर कोर्ट द्वारा 2013 के दंगे के मामले में 2 साल की सजा  सुनाई जा चुकी थी। लेकिन किन्ही कारणो से मामला दबा हुआ था जयंत चौधरी के सदस्यता रद्द करने की मांग करने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया मीडिया कर्मी और सोशल मीडिया पर अखबारों में तरह तरह की पोस्ट करने लगी इसी बीच अपनी सारगर्भित तर्कसंगत भाषा के लिए मशहूर विधायक विक्रम सैनी ने एक चैनल को इंटरव्यू देते हुए जयंत चौधरी को कानून की समझ ना होने और उनके पिता चौधरी अजीत सिंह जी कि मुजफ्फरनगर लोकसभा चुनाव 2019 में हुई हार को याद दिलाते हुए जयंत चौधरी के चुनाव लड़ने पर जमानत जब्त करने का चैलेंज दे दिया इसी बीच विधानसभा के द्वारा खतौली की सीट रिक्त कर दी गई इस बात का जश्न मनाने के लिए जयंत चौधरी का रैली कार्यक्रम खतौली में घोषित हो गया इसी बीच उत्तर प्रदेश में मैनपुरी खतौली और रामपुर का उपचुनाव कराने के लिए आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई इसके बाद जयंत चौधरी ने तीन जगह पीपलहेड़ा,तिसंग और मंसूरपुर में सभा आयोजित कर अपनी बात रखी खतौली के लोकल नेताओं अभिषेक चौधरी,राजपाल सैनी और संजय राठी ने इन तीनों जगहों पर इन सभाओं का आयोजन कराया इन सभाओं का आयोजन होने के बाद जयंत चौधरी ने अपनी दिल अपना काफिला दिल्ली की ओर कूच करने के साथ ही खेकड़ा विधानसभा से 4 बार के विधायक मदन भैया को पार्टी के का वफादार होने के इनाम के तौर पर खतौली के उपचुनाव का गठबंधन का प्रत्याशी घोषित कर दिया जिसके मुजफ्फरनगर की लोकल लीडरशिप का टिकट न होने और बाहरी को टिकट देने के कारण विरोध के स्वर उभरने लगे, और गठबंधन प्रत्याशी पर रिकार्ड हार के बादल मंडराने लगे राष्ट्रीय लोक दल के नेता अभिषेक चौधरी व मेरठ क्षेत्र के अन्य नेता राष्ट्रीय लोकदल को छोड़कर राष्ट्रीय भारतीय जनता पार्टी मे शामिल हो गये। आपको बता दें जिस दिन जयंत चौधरी के तीन कार्यक्रम खतौली विधानसभा में थे उसी दिन पड़ोस की विधानसभा मीरापुर के कस्बे भोकरहेड़ी में आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक चंद्रशेखर रावण अपने कार्यकर्ताओं और शोषित वंचित समाज का सम्मेलन कर रहे थे उन्होंने वहीं मंच से खतौली विधान सभा में खतौली उपचुनाव में प्रत्याशी खडा करने की घोषणा कर दी चुनावी सरगर्मी में चुनावी सरगर्मियां तेज जब हुई जब घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब रालोद सुप्रीमो ने डैमेज कंट्रोल करते हुए चन्द्रशेखर रावण से फोन पर बात की और मीरापुर के विधायक चंदन सिंह चौहान को उनके पास भेजा जिसके बाद भोपा नहर पर दोनो की बात हुई और आजाद समाज पार्टी गठबंधन का हिस्सा बन सहित्यिक गठबंधन का हिस्सा और चंद्रशेखर आजाद ने रालोद प्रत्याशी मदन भैया को अपना समर्थन दे दिया आमतौर पर देखा गया है उपचुनाव में बसपा अपना प्रत्याशी नहीं उतारती है और ज्यादातर दलित वोट भाजपा को मिल जाता है आजाद समाज पार्टी का पश्चिम क्षेत्र में दलित समुदाय में अच्छी पकड़ है लेकिन आजाद समाज पार्टी का अभी तक किसी भी बड़ी पार्टी से कोई गठबंधन नहीं हुआ था यह पहला चुनाव था जिसमें आजाद समाज पार्टी समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के गठबंधन के रूप में नया प्रयोग हुआ जिससे गठबंधन का चुनाव रंग में आ गया बाहरी भीतरी का मुद्दा फीका पड़ने लगा वहीं दूसरी ओर भाजपा से कई लोग टिकट की लाइन में थे लेकिन भाजपा ने विधायक विक्रम सैनी की पत्नी कोई खतौली से अपने प्रत्याशी के रूप में उतारा जिससे अन्य प्रत्याशी उत्साह के साथ चुनाव में सहयोग नहीं दे पाए दूसरी तरफ भाजपा की चुनौती कम होने का नाम नहीं ले रही थी विधायक जी की सारगर्भित भाषा और भाषण के साथ-साथ 2013 कवाल कांड में मृतक गौरव की मां भाजपा को के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़ी थी इसके अलावा रवा राजपूत प्रदीप ठाकुर भी समाज के सम्मान के लिए निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे त्यागी समाज भी श्रीकांत त्यागी प्रकरण के बाद भाजपा को सबक सिखाने के मूड में था केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान घर घर जाकर लगातार लोगों को समझा रहे थे और भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए बोल रहे हैं लेकिन हर जगह विधायक विक्रम सैनी जी के अच्छे कामों की वजह से वोटरों का उत्साह दोगुना हो जाता था खतौली विधान सभा में 2014,2017,2019,2022 मे भाजपा को भरपूर समर्थन मिला था 2019 में दो चौधरी अजीत सिंह के सामने सपा बसपा लोकदल के गठबंधन के बावजूद यह विधानसभा भाजपा 30000 के लगभग वोटों से जीती थी मीडिया के लोग इसे पश्चिम की चौधराहट तय करने वाला और लोकसभा का सेमीफाइनल बताने लगे विधानसभा के पुराने समीकरण और अपनी मिलनसारी मेहनत और आत्मविश्वास के कारण केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को पूरा विश्वास था कि वह केंद्र और राज्य सरकार के अच्छे काम के साथ-साथ अपने नाम और काम से इस सीट को जिताने में सफल हो जाएंगे भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ,बृजेश पाठक पश्चिम क्षेत्र के अध्यक्ष मोहित बेनीवाल ,प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ,केंद्र सरकार के मंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्री, हर बिरादरी के नेता, विधायक खतौली में दौरा करते रहे और प्रत्याशी को और गठबंधन के प्रत्याशी को बाहुबली बाहरी बताते रहे लेकिन उनका जनता में कोई असर नहीं हुआ वहीं दूसरी ओर जयंत चौधरी ने अकेले 50 से अधिक गांव मे सभा की डोर टू डोर संपर्क किया,और  लोकल मुद्दों पर चुनाव लड़ा भाजपा की ओर से हर बडे। से छोटा नेता,मंत्री और पदाधिकारी दंगे को ही भुनाने में लगा रहा माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की रैली के बाद भाजपा ने डैमेज कंट्रोल करते हुए दो निर्दलीय प्रत्याशी गौरव की माताजी और रवा राजपूत समाज से प्रदीप ठाकुर को अपने पक्ष में कर लिया लेकिन तब तक चुनाव बहुत दूर जा चुका था जनता ने "भाजपा संजीव से बैर नही विक्रम तेरी खैर नही" नारे के साथ विक्रम सैनी के विरोध मे लामबन्द हो गये जिससे विरोधियो का पलडा भारी होने भाजपा समर्थक गाँव मे मतदान प्रतिशत कम होने के कारण गठबंधन हर चरण में आगे रहा और मदन भैया को दलित मुस्लिम जाट गुज्जर त्यागी ब्राह्मण आदि सर्व समाज ने हर बूथ पर समर्थन किया और भाजपा का अभेद किला 22000 से अधिक वोटों के अंतर से राष्ट्रीय लोक दल के हिस्से में चला गया और इस सामाजिक गठबंधन और विरोध के बाद बने नए सामाजिक समीकरण ने खतौली में जीत की एक नई इबारत लिख दी, और लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि कितनी भी बडी सत्ता हो जनता से ही विजय पराजय होती है, मोदी योगी के भरोसे आप मेन चुनाव तो जीत सकते हैं लेकिन समीकरण कितने भी अनुकूल हो लोगों को उपचुनाव में हर तरह की बातें मुद्दे याद आ जाते है और वे सरकार को सबक सिखाने और वादो को याद दिलाने के मूड में रहते हैं।






यह लेखक के निजी विचार है, समाचार पत्र के संपादक मंडल का सहमत होना आवश्यक नहीं..

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