अमेजन इंडिया में परिवर्तन का नेतृत्व कर रही महिलाएं

 लियाकत मंसूरी 

नोएडा। जैसे-जैसे इंडिया इंक कार्यस्थल पर लैंगिक समानता के फायदों को समझ रहा है, वैसे-वैसे 87 प्रतिशत कंपनियां लैंगिक विविधता के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध हो रही हैं, जो 2012 में 56 प्रतिशत के मुकाबले काफी ज्यादा है, जब मैककिन्से ने पहली बार वूमैन एट वर्क का सर्वे किया था, संगठनों ने अपना मानसिक मॉडल बदल दिया है और ऐसी नीतियों का क्रियान्वयन कर लिया है, जो महिलाओं को सशक्त बनाती हैं और विविधता एवं समावेशन की विधियों का पालन कर कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए समानतापूर्ण अवसर सुनिश्चित करती हैं। 

अग्रगामी सोच वाले अनेक संगठनों जैसे अमेजन इंडिया के लिए लैंगिक समानता मुख्य प्राथमिकता है, फिर चाहे महिलाओं के एक समान प्रतिनिधित्व पर बल दिया जाना हो या फिर विविधता के लिए भर्ती या महिला उद्यमियों का सहयोग करना हो, अमेजन महिलाओं के अनुपात के लिए लक्ष्य स्थापित करता है, विभिन्न कार्यों के लिए भर्ती में 50 प्रतिशत रिज्यूमे महिलाओं के होने के साथ सही इनपुट पर बल देता है और महिलाओं को भर्ती में सफल होने एवं अपने कार्य में आगे बढ़ने में समर्थ बनाने के लिए मेंटरशिप और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विकास करता है। अमेजन पर हजारों महिलाएं अपनी पहचान बना रही हैं और पुरानी मान्यताओं को तोड़ रही हैं। उन्हीं में से दो दिल्ली-स्थित अमेजन कर्मचारी एवं सैलर की कहानी यहां दी जा रही है, जिन्होंने नई ऊंचाइयां छूकर सप्लाई चेन एवं उद्यमशीलता में गैर पारंपरिक मार्ग चुनकर अपना करियर स्वयं बनाया।

अमेजन की संस्कृति समावेशी है: अपर्णा गुलाटी

अपर्णा गुलाटी उत्तरी क्षेत्र के लिए सेलर फ्लेक्स मिडिल माइल आॅपरेशंस का नेतृत्व करती है, अपनी इस भूमिका में वह उत्तर भारत में बाहरी फुलफिलमेंट नोड्स से शिपमेंट पिकअप आॅपरेशंस की योजना बना कर उनका क्रियान्वयन करती है और उन्हें क्षेत्र में सॉर्ट सेंटर्स के साथ जोड़ती है, अमेजन में केवल 9 महीने काम करने के बावजूद अपर्णा को एक बड़ा आॅपरेशन एवं टीम का नेतृत्व करने का अवसर दिया गया, अपने इस सफर के बारे में अपर्णा ने बताया, अमेजन की संस्कृति समावेशी है। यहां हर व्यक्ति के दृष्टिकोण को सुना जाता है, फिर उसकी पृष्ठभूमि चाहे कोई भी हो यहां प्रतिभागिता, टीम वर्क को प्रोत्साहित किया जाता है और हर व्यक्ति का सम्मान होता है तथा उन्हें समावेशन और समानता का अहसास मिलता है। हम हर दिन सुधार करने, इनोवेट करने और चुनौतियां स्वीकार करने का प्रयास करते हैं, ताकि हम बेहतर ग्राहक अनुभव प्रदान कर सकें।

विभिन्न स्कूलों में एजुकेटर रही वंदना बत्रा

10 सालों तक विभिन्न स्कूलों में एजुकेटर रही वंदना बत्रा (फाउंडर एवं सीईओ, फेयरी टेल्स क्रिएशन) स्कूलों में सांस्कृतिक ईवेंट्स के लिए कॉस्ट्यूम उपलब्ध कराना चाहती थीं, क्योंकि उन्हें खुद वार्षिक फंक्शन के दौरान ड्रेस खरीदने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था, पिछले 19 सालों में उनका वेंचर फेयरी टेल्स क्रिएशन दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 300 बी2बी ग्राहकों के साथ बच्चों के लिए एक लोकप्रिय ब्रांड बन गया लेकिन, महामारी के कारण उन्हें अपने बिजनेस मॉडल में परिवर्तन लाना पड़ा और वो अमेजन प्रोग्राम में लोकल शॉप्स के साथ आॅनलाइन व्यवसाय करने लगीं अपने इस नए ब्रांड को उन्होंने इट्समाईकॉस्ट्यूम नाम दिया, उन्हें आॅफलाइन चैनल के मुकाबले पूरे देश में अलग-अलग क्षेत्रों से 40 गुना ज्यादा आॅर्डर मिलने लगे, जहां से आॅर्डर मिलने के बारे में उन्होंने सोचा भी नहीं था। 

मां से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ी मेजर अपर्णा गुलाटी

12 साल तक भारतीय सेना को अपनी सेवाएं देने के बाद मेजर अपर्णा गुलाटी (रिटायर्ड) ने अपना करियर बदलने और नागरिक जीवन में एक अन्य सफल करियर बनाने का निर्णय लिया। अपनी माँ से प्रेरणा लेकर अपर्णा सदैव अपनी खुद की पहचान बनाना चाहती थी, फिर चाहे उसे अत्यधिक ऊँचे इलाकों में अपनी सेवाएं देना हों या फिर अमेजन पर टीम का नेतृत्व करना हो वह आर्मी मेडिकल कोर में एक डॉक्टर (कार्डियेक एनेस्थेसियोलॉजिस्ट) लेफ्टिनेंट कर्नल कुणाल सरीन की विवाहिता हैं। अपर्णा को शादी के बाद भी महिलाओं की स्वतंत्रता एवं सफल करियर का समर्थन करने वाला जीवनसाथी मिला।

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