वेलबीइंग समिट से दुनिया को दिया गया वेलनेस का संदेश

 


- नई दिल्ली में आयोजित हुई थर्ड राष्ट्रीय वेलबीइंग समिट

- योग, आयुर्वेद से जीवन को बनाएं स्वस्थ और समृद्ध

- योग हमें सम्पूर्ण वेलबीइंग प्रदान करता हैः पद्मश्री भारत भूषण




केएसवी आयुर्वेद मेडिकल काॅलेज एंड रिसर्च सेंटर, शोभित विश्वविद्यालय द्वारा श्री जगदीश प्रसाद माथुर जी के 100 वें जन्म दिवस पर थर्ड वेलबीइंग समिट का आयोजन नई दिल्ली में किया गया। इस अवसर पर आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा मानव-जीवन को और अधिक सरल, सुखद और स्वस्थ बनाने पर चिंतन और मंथन किया गया। साथ ही इन क्षेत्रों में शोधात्मक प्रगति और इन्हें व्यवसायिक तौर पर बढ़ावा देने की सम्भावनाओं पर विचार भी साझा किए गए। समिट में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े विशेषज्ञों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों, चिकित्सकों, शोधार्थियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कॅनाट प्लेस स्थित ली मेरिडिअन होटल में आयोजित थर्ड वेलबीइंग समिट का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। समिट दो सत्रों में आयोजित की गई। समिट का परिचय देते हुए विश्वविद्यालय के चांसलर श्री कुंवर शेखर विजेंद्र जी ने इसके व्यापक उद्देश्यों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव के संदेश के साथ आयोजित किया जा रहा है। यहां चिंतन और शोध की आजादी भी है, यह  समिट   एक अमृत के लिए समुद्र मंथन भी है। इस मंथन से हर व्यक्ति अपने अनुसार कुछ न कुछ प्राप्त कर सकता है। साथ ही यह योग और आयुर्वेद का महोत्सव भी है। कार्यक्रम में वीडियो संदेश के माध्यम से माननीय आयुष राज्य मंत्री डाॅ धर्म सिंह सैनी जी ने कहा यह समिट जिस प्रकार गत दो वर्षों से आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में विश्वस्तरीय शिक्षा नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा दे रहा है वह बेहद सराहनीय है। समिट में सम्मिलित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं छात्रों को हार्दिक शुभकामनाएं। आशा है कि वे इस समिट से प्रेरित और प्रोत्साहित होकर आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र को अपने-अपने प्रयासों से समृद्ध करने का प्रयास करेंगे। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री श्याम जाजू ने कहा कि योग हमारी जीवन पद्धति है। आज दुनिया के अधिकांश राष्ट्र भारत की इस पुरातन और सनातन परम्परा का अनुसरण कर रहे हैं। योग पर शोध के साथ-साथ दिन-प्रतिदिन नए पाठ्यक्रम तैयार हो रहे हैं। समिट जैसी परम्पराएं ही हमारी योग परम्परा को और अधिक समृद्ध करेंगी। उन्होंने श्री जेपी माथुर जी के जीवन पर भी प्रकाश डाला। योग गुरु पद्मश्री भारत भूषण जी ने कहा शिक्षा केंद्रों की योग और आयुर्वेद जैसे क्षेत्रों में महती भूमिकाएं होनी ही चाहिए। हमें योग को उच्चतम की ओर ले जाना है। योग व्यक्ति और व्यक्तित्व दोनों को ही संवारता है। योग दृष्टिकोण बदलने की शक्ति रखता है। योग ही हमें सम्पूर्ण वेलबीइंग भी प्रदान कर सकता है। कैराना के सांसद श्री प्रदीप चौधरी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में शोभित विश्वविद्यालय का यह संदेश देश भर में जा रहा है, यह महत्वपूर्ण है। उत्कृष्ट कार्य अनेक धारणाओं को बदलने का कार्य करते हैं। समाज के लिए उपयोगी योग, आयुर्वेद को बढ़ावा देने का ऐसा प्रत्येक कार्य प्रशंसनीय है।

इस दौरान शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह के बीएनवाईएस एवं योग के विद्यार्थियों ने अपनी योग प्रस्तुतियों से भी आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तिब्बत हाउस के निदेशक वेन गेशे दोरजी दाम्दुल ने कहा कि संसार की विषमताओं से बाहर निकलने का समाधान वेलबीइंग ही है। यह बाहरी भी है और आंतरिक भी। चिंतन की व्यापकता और स्पष्टता हमें प्रत्येक स्थिति में बेहतर रखती है। योग आचार्य एवं कत्थक नृत्यांगना प्रतिष्ठा शर्मा ने कहा कि हम जो होते हैं, वही दूसरों को भी देते हैं। यदि हम प्रसन्न रहें तो हमें देखकर दूसरे स्वतः ही प्रसन्न हो जाते हैं। हमें अपनी स्थितियों को बेहतर मानकर प्रसन्न रहने की आदत डालनी चाहिए। धन और साधनों की अधिकता सुख का कारण कभी भी नहीं बन सकती।

द्वितीय सत्र का शुभारंभ योग मंदिरम् ट्रस्ट के संस्थापक डाॅ सुरक्षित गोस्वामी ने बाहरी चकाचौंध से निकलकर भीतर के खालीपन को देखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब हम बाहरी कीर्ति में ही जीते हैं तो भीतर से खाली हो जाते हैं। किंतु भीतर का खालीपन हमसे नहीं छिपता और न ही हम बाहरी सुंदरता से भीतर की कुरूपता को छिपा सकते हैं। निष्कपटता, सरलता, सहजता, निश्छलता ही समाज के बीच वेलबीइंग का कार्य करती है, यह मानव जीवन के लिए अति आवश्यक है।

इसके पश्चात् ‘रूद्राक्षः एक दैवीय पौधा’ इस विषय पर डाॅ शिवा शर्मा, डाॅ जयानंद, डाॅ संदीप कुमार, डाॅ अल्पना जोशी द्वारा संवाद किया गया। संवाद में रुद्राक्ष के औषधीय गुणों से लेकर इस पर हो रहे शोध कार्यों का परिचय दिया गया। बताया गया कि किस प्रकार शोभित विश्वविद्यालय एक लम्बे समय से रुद्राक्ष पर शोध एवं इसके विस्तार के लिए कार्य कर रहा है। सांऊड हीलर अंजू शर्मा ने कहा कि संगीत का प्रभाव हमारे चिंतन और स्वास्थ्य को सकारात्मकता प्रदान कर सकता है। उनकी टीम ने संगीत के विविध उपकरणों के माध्यम से स्वर-थैरेपी का प्रयोग भी किया। इसी क्रम में भविष्य में वेलबीइंग के क्षेत्र के व्यवसायीकरण और पर्यटन की सम्भावनाओं पर सेवन सीज स्पा के संस्थापक श्री अर्पित शर्मा, अग्रवाल्स होमियो क्लिनिक के निदेशक डाॅ पंकज अग्रवाल ने अपने विचार रखे और बताया कि किस प्रकार यह सम्भावनाओं का एक बड़ा क्षेत्र भी है। मिनस्ट्री ऑफ आयुष से सम्बंधित मोरारजी देसाई राष्ट्रीय संस्थान ऑफ योग के निदेशक डाॅ ईश्वर वी बसर्वद्धी ने कहा कि योग में शोध एवं प्रयोग की अन्यतमम् संभावनाएं हैं। शिक्षा, तकनीक, शोध, अध्यात्म और विश्व शांति में भी योग का महत्वपूर्ण है। योग दर्शन है, विज्ञान है और अध्यात्म है। योग न केवल तनाव कम करता है बल्कि मानव में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी करता है। आध्यात्मिक वेलनेस पर ज्योतिषज्ञ श्री अशोक वासुदेव, मीना महाजन और प्रवीण चौहान जी ने संवाद किया और बताया कि किस प्रकार योग-अध्यात्म विषाद से प्रसाद तक की यात्रा है। आयुर्वेद और पंचकर्म सलाहकार डाॅ अमित वर्मा ने कहा कि जीवन में वेलनेस के लिए आहार-विहार अति आवश्यक हैं। आहार भूख के अनुसार करना आवश्यक है। समिट में शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह के वीसी प्रो रणजीत सिंह, शोभित विवि मेरठ के वीसी प्रो अजय राणा द्वारा अतिथियों को रुद्राक्ष का पौधा एवं समिट प्रतीक-पत्र सम्मान रूप में भेंट किया गया। समिट का संचालन डाॅ नेहा वशिष्ठ ने किया।

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