मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल, वैशाली ने मेरठ में आर्थोपेडिक्स एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट ओपीडी खोली

 

 


· यह ओपीडी सेवाएं हर महीने के पहले और तीसरे बृहस्पतिवार को मैक्स मेड सेंटर, मेरठ में संचालित होगी 


मेरठ, 21 अक्तूबर, 2021: उत्तर प्रदेश का अग्रणी स्वास्थ्य संस्थान मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल, वैशाली (गाजियाबाद) ने आज मेरठ स्थित मैक्स मेड सेंटर में अपनी आॅर्थोपेडिक्स एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट ओपीडी सेवाएं शुरू की। 


ओपीडी सेवाओं का शुभारंभ डॉ. अखिलेश यादव ने किया, जो परामर्श के लिए भी हर महीने के पहले और तीसरे बृहस्पतिवार को यहां आएंगे। इस ओपीडी में आॅस्टियोअर्थराइटिस, रूमेटोइड अर्थराइटिस, पोस्ट—ट्रॉमेटिक अर्थराइटिस, गॉटी अर्थराइटिस से पीड़ितों या खराब घुटनों के कारण दर्द से पीड़ित लोगों को टोटल नी रिप्लेसमेंट (टीकेआर) के बारे में विशेषज्ञ सलाह दी जाएगी जो उनके लिए सबसे ज्यादा अच्छा माना जाता है। 


अधिक उम्र, मोटापा, पूर्व में दुर्घटनाओं के कारण जोड़ों में चोट/जोड़ों के अधिक इस्तेमाल और जोड़ों में विकृति जैसे कारणों से मरीज को टीकेआर कराना पड़ जाता है। गंभीर मामलों में जब अन्य उपचार पद्धतियां मरीज की स्थिति सुधारने में विफल हो जाती हैं तो सर्जिकल उपचार भी विकल्प दिया जाता है। नियमित चिकित्सा उपचार में शामिल है: गतिविधियों में सुधार, दर्दनिवारक दवाइयां और जोड़ों का इंजेक्शन। लेकिन जब इन प्रक्रियाओं से आराम नहीं मिलता है या जोड़ के रोजमर्रा के काम करने लायक नहीं रह जाने की स्थिति में या घुटने के जोड़ में अस्थिरता या जोड़ की सक्रियता कम होने की स्थिति में कंसल्टिंग स्पेशलिस्ट से सर्जरी कराने की सिफारिश की जाती है। 


इस मौके पर डॉ. यादव ने कहा, 'घुटने की समस्या लेकर आने वाले उन सभी मरीजों की हम सभी प्रकार की जांच कराते हैं जिन्हें सर्जरी की आवश्यकता होती है। जब मरीजों की जांच सही पाई जाती है तो हम चरणबद्ध तरीके से दोनों घुटनों की सर्जरी (बी/एल टीकेआर) करते हैं जिसमें दो अलग—अलग सर्जरी के जरिये दोनों घुटनों का प्रत्यारोपण किया जाता है। इतनी सारी सर्जरी करने के बाद मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि मेरे लिए यह खुशी की बात होती है कि ऐसे मरीज बिना किसी समस्या के अपनी दैनिक गतिविधियों में लौट जाते हैं। मैं घुटने की समस्या से पीड़ित उन सभी मरीजों को बेहतर जीवन पाने के लिए सर्जरी कराने के लिए प्रोत्साहित करता हूं। इससे उनकी अन्य लोगों पर निर्भरता धीरे—धीरे कम होने लगेगी और वे बहुत ज्यादा खुशहाल तथा स्वतंत्र महसूस करेंगे।'


 डॉ. यादव ने इस दौरान कुछ मरीजों के अनुभव भी बताए। उन्होंने कहा, '40 वर्षीय संजय जैन को घुटनों में बहुत दर्द रहता था और उठने, चलने तथा बैठने में भी दिक्कत आती थी। उन्हें छड़ी के सहारे अपनी दैनिक क्रियाएं करनी पड़ती थीं और इस दयनीय स्थिति में वह पांच साल से थे। हमने उनके घुटने का आॅपरेशन किया और अब कहीं भी आ—जा सकते हैं तथा छड़ी के बिना ही अपनी हर दैनिक गतिविधियां कर लेते हैं। इसी तरह 60 वर्षीया उषा गर्ग ने घुटना प्रत्यारोपण कराने के बाद छड़ी के बिना सभी काम करती हैं। मेरठ की इस नई ओपीडी से हम उम्मीद करते हैं कि ऐसी समस्याओं से पीड़ित बहुत सारे मरीजों को लाभ मिलेगा, जिन्हें अपना इलाज कराने के लिए पहले दूसरे शहर की यात्रा करनी पड़ती थी।'

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