राजकीय बाल गृह (बालक) मेरठ का शैक्षणिक भ्रमण




सरदार पटेल सुभारती लॉ कॉलिज, स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ के शिक्षक एवं छात्रों द्वारा “आजादी के अमृत महोत्सव, के आयोजन पर कार्यक्रमों की श्रृंखला में “विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस” पर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से राजकीय बाल गृह (बालक) मेरठ का शैक्षणिक भ्रमण किया गया। इस कार्यक्रम की आधारशिला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ के निर्देशानुसार सुभारती विधि संस्थान के संकायाध्यक्ष, प्रो.(डॉ.) वैभव गोयल भारतीय के मार्गदर्शन में रखी गयी। 

सुभारती लॉ कॉलिज के शिक्षक डॉ. सारिका त्यागी व शालिनी गोयल के नेतृत्व में छात्रों के एक दल ने राजकीय बाल गृह (बालक) मेरठ का शैक्षणिक भ्रमण किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ के प्रतिनिधि कुलदीप सिंह व राजकीय बाल गृह (बालक) मेरठ के अधीक्षक सुरेश चन्द्र के  साथ सुभारती लॉ कॉलिज के दल ने वहाँ रह रहे बालकों से विभिन्न विषयों पर वार्ता की। बाल गृह के अधीक्षक द्वारा विधि के छात्रों को बताया गया कि ये सब बालक 10 से 18 वर्ष की आयु के मध्य के हैं तथा मेरठ तथा आस पास के अन्य जिलों से हैं। उन्होनें बताया कि केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा ऐसे बालक, जोकि घर से भाग गये हैं या परिवार में कोई नही है  के पुनर्वास हेतु विभिन्न प्रकार की बाल कल्याण योजनाएं जैसे कि स्वास्थ्य एवं पोषण योजना, शिक्षा का अधिकार योजना के साथ-साथ ऐसे बालकों के लिए पुनर्वास योजना भी सरकार द्वारा चलायी जाती हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कुलदीप सिंह द्वारा छात्रों को जानकारी दी गई कि ऐसे बालक-बालिकाएं, जिनके माता पिता या संरक्षक की कोविड-19 काल में कोविड से मृत्यु हो गई है, को सरकार दवारा 4000/- प्रतिमाह आर्थिक भत्ता दिया जा रहा है, ताकि बालक आर्थिक रूप से किसी पर निर्भर न रहे। इन बालकों के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाओं को लागू करने का कार्य महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किया जाता है। बाल गृह के बालकों को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो सके, इसके लिए बालगृह, गैरराजकीय संस्थाओं एवं सरकार का क्या रूख है, के सवाल पर अधीक्षक द्वारा जवाब दिया गया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा प्राथमिक स्तर पर शिक्षा देने हेतु शिक्षकों की नियुक्ति बाल गृह में ही कर दी जाती है। इसके पश्चात आगे की पढाई के लिए छात्रों को सी.बी.एस.ई., राजकीय एवं गैरराजकीय विद्यालयों में पढ़ाने हेतु नगर स्थित विभिन्न स्कूलों में भी प्रवेश करवाने का प्रयास बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से बालगृह के अधीक्षक द्वारा किया जाता है। इस प्रकार के बाल सुरक्षा गृह की स्थापना करने के पीछे सरकार का उद्देश्य निर्वासित बालकों को घर जैसा वातावरण उपलब्ध करवाना है क्योकि बच्चों के आस-पास जैसी बाते होती हैं, जैसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, बच्चे उन सब से सीखते हैं। घर का वातावरण बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थय पर बहुत गहरा असर डालता है। ऐसे बच्चे जो अपने ही परिवार में “खतरे में हों, सड़कों पर लावारिस हो, परिवार द्वारा ट्रेन या सड़क पर छोड़ दिए गए हों या बिछुड़ गए हो, को घर जैसा वातावरण प्रदान करने के लिए इस प्रकार के बाल गृहों का निर्माण राज्य सरकारों द्वारा जिला स्तर पर किया जाता है। इसके अतिरिक्त छात्रों ने बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड में कौन लोग सदस्य होते हैं, जैसे प्रश्न भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ के प्रतिनिधि कुलदीप सिंह जी से पूछे, जिसके जवाब में उन्होनें बताया कि बाल कल्याण समिति मेरठ के अधिकारी का नाम श्री अजय कुमार हैं, वहीं किशोर न्याय बोर्ड में सिविल जज (सीनियर डिविजन) के साथ-साथ एक अधिवक्ता, गैर सरकारी संस्था के सदस्य तथा वरिष्ठ समाज सेवी सदस्य होते हैं।     

इस कार्यक्रम में अमन बंसल, हिमांशु पंवार, तंजिल, अनिल किशोर, सुमित शर्मा, परमजीत व अभयजीत, सुभारती लॉ कॉलिज से उपस्थित रहे।

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