सुभारती विधि संस्थान ने किया नि:शुल्क विधिक सहायता शिविर का आयोजन





स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संयुक्त रूप से ग्राम इटायरा में परतापुर में दिनांक 25/09/2021 को एक नि:शुल्क विधिक सहायता शिविर का आयोजन सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान के निदेशक श्री राजेश चन्द्रा (पूर्व न्यायमूर्ति, प्रयागराज उच्च न्यायालय, उ.प्र.) के मार्ग दर्शन एवं विधि विभाग के संकायाध्यक्ष प्रो.(डॉ.) वैभव गोयल भारतीय के दिशा निर्देशन में किया गया। 

निदेशक श्री राजेश चन्द्रा, एवं प्रो.(डॉ.) वैभव गोयल भारतीय ने संयुक्त रूप से सम्बोंधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के नि:शुल्क विधिक सेवा शिविर विधि व्यवसाय का आवश्यक पहलू है। 

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. आशुतोष गर्ग (एसोसिएट प्रोफेसर, सुभारती लॉ कॉलिज) ने कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि, श्रीमति अंजू कांबोज, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ श्री मामचन्द जी ग्राम प्रधान इटायरा परतापुर मेरठ श्रीमति शशिवर्मा, प्रधानाचार्य, कम्पोजिट विद्यालय, इटायरा, मेरठ शालिनी गोयल एवं अंजुम जहां प्रवक्ता, सुभारती लॉ कॉलिज, मेरठ का परिचय उपस्थित महिलाओ, बच्चों व पुरूषो से करवाया। 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि का स्वागत श्रीमति शशि वर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ विद्या की देवी सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया गया। कार्यक्रम में प्रथम वक्ता के रूप में शालिनी गोयल द्वारा नि:शुल्क विधिक सेवा क्या है और इसके लिए कौन-कौन पात्र हैं और विधिक सहायता के क्या उद्देश्य हैं विषय पर उपस्थित लोगों को बताया गया। उन्होनें कहा कि समस्त न्यायालयों, प्राधिकरणों, आयोगों में लम्बित विचाराधीन वाद/मामलों में, गरीब तथा आम व्यक्तियों के लिए न्याय शुल्क सहित वकील की फीस एवं अन्य सभी आवश्यक वाद व्यय, विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया जाना परामर्श एवं सुलह समझौता केन्द्रों में माध्यस्थ द्वारा पारिवारिक विवादों को सुलझाना, आदि शामिल है। इसके अतिरिक्त मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद में पीड़ित को न्याय एवं अन्य सभी प्रकार के वादों को सुलह समझौते द्वारा शीघ्र न्याय दिलाया जाता है। नि:शुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने वाले व्यक्तियों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सदस्य, महिलाएं एवं बच्चें, मानसिक रोगी एवं विकलांग, जातीय हिंसा, बाढ़, सूखा, भूकम्प या औद्योगिक विनाश, औद्योगिक श्रमिक, कारागृह किशोर या ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय एक लाख रूपये से कम हैं आदि शामिल है। उन्होंने सरदार पटेल सुभारती लॉ कॉलिज में संचालित नि:शुल्क विधिक सहायता क्लीनिक के विषय में बताते हुए कहा कि सुभारती लॉ कॉलिज में विधिक मुद्दों पर नि:शुल्क सलाह सप्ताह के सभी दिनों अर्थात सोमवार से शनिवार तक प्रात:08:00 बजे से सांय 04:00 बजे तक ली जा सकती है। इसके अलावा आप  vidhikmitra.law@subharti.org  पर ईमेल के माध्यम से तथा 9639010415 पर व्हाट्सएप्प के जरिए या फिर फोन न. 01212660078 पर भी नि:शुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।  

कार्यक्रम के दूसरे वक्ता के रूप में अंजुम जहां प्रवक्ता सुभारती लॉ कॉलिज को संचालक डॉ. आशुतोष गर्ग द्वारा आमंत्रित किया गया। अपने वक्तव्य में अंजुम जहां ने महिलाओं को प्राप्त विभिन्न प्रकार के आधिकारों एवं उल्लघंन पर उन्हें किस प्रकार लागू करवाया जा सकता है के विषय में उपस्थित लोगों को बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज में महिलाओं को सशक्तिकरण की अधिक आवश्यकता है। रेप पीड़िता महिला के पास अधिकार है कि वह किसी भी पुलिस स्टेशन पर अपनी शिकायत दर्ज  करा सकती है। पुलिस स्टेशन थाना सीमा से बाहर का मामला कहकर उसे वापिस नही कर सकता है। महिला के पास सी.आर.पी.सी. की धारा 160 के तहत यह अधिकार प्राप्त है कि उन्हें पुलिस स्टेशन पूछताछ के लिए नही बुलाया जा सकता है। साथ ही सूर्यास्त के बाद व सूर्योदय के पहले किसी भी महिला को पुलिस गिरफ्तार नही कर सकती है। इसके अतिरिक्त महिला की गिरफ्तारी के समय महिला कांस्टेबल का होना अति आवश्यक है। रात के समय महिला कैदी को थाने में नही रखा जा सकता है। महिला को पिता की संपत्ति में पुत्र के समान बराबर अधिकार प्राप्त है। अपराध पीड़ित महिला को यह भी अधिकार प्राप्त है कि उसकी गोपनीयता को बरकरार रखा जाए। किसी भी कंपनी या संस्था में काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षा पाने का अधिकार है। सभी सरकारी/गैरसरकारी संस्थाओं में एक कमेंटी होनी चाहिए, जिसकी संचालन महिला के हाथ में हो, ऐसे दिशा निर्दश माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए है। इसके अतिरिक्त महिलाओं के पास घरेलू हिंसा से संरक्षण का भी अधिकार प्राप्त है। काम काजी महिलाओं के पास मातृत्व लाभ की सुविधा का भी अधिकार है। इस छ: माह की अवधि में महिला को पूरी सैलरी प्राप्त करने का भी अधिकार प्राप्त है। 

तीसरे वक्ता के तौर पर कार्यक्रम के संचालक द्वारा कम्पोजिट विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमति शशि वर्मा जी को आमांत्रित किया गया। उन्होनें मिशन शक्ति फेस 3 के द्वारा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के साथ-साथ छात्रों को पोक्सो एक्ट के विषय में संक्षिप्त रूप से बताया गया । जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मेरठ की सचिव श्रीमति अंजू कांबोज द्वारा बताया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण 1987 के तहत किया गया है। इसका मुख्य कार्य कानूनी सहायता कार्यक्रम लागू करना और उसका मूल्यांकन एवं निगरानी करना है। इसका कार्य किसी कानूनी कार्यवाही में कोर्ट फीस और देय अन्य सभी प्रभार अदा करना, कानूनी कार्यवाही मे वकील उपलब्ध करवाना, आदेशों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त कर, कानूनी कार्यवाही में अपील और दस्तावेज का अनुवाद और छपाई सहित पेपर बुक तैयार कराना आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वादकारी की स्थिति एक बीमार व्यक्ति की तरह होती है जो शीघ्र से शीघ्र इस बीमारी से निदान पाना चाहता है। जनमानस में प्रचार प्रसार के द्वारा नवीनतम विधि से आम जनता को अवगत कराया जाना विधिक साक्षरता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। 

कार्यक्रम में गावं इटायरा के पूर्व प्रधान श्री ओमपाल द्वारा सुभारती लॉ कॉलिज के द्वारा आयोजित कार्यक्रम की प्रंशसा की गई। ग्राम प्रधान श्री मामचन्द जी द्वारा स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज द्वारा आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए भविष्य में अपना सहयोग लॉ कॉलिज के देते रहने का आश्वासन दिया गया।  

कार्यक्रम के संचालक डॉ. आशुतोष गर्ग द्वारा संपूर्ण कार्यक्रम में वक्ताओं द्वारा बतायी गई बातों की आख्या प्रस्तुत की गई एवं इसके अतिरिक्त उन्होनें उपस्थित लोगो को विभिन्न प्रकार के अन्य विधिक अधिकारों के विषय में भी बताया। डॉ. आशुतोष गर्ग द्वारा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ग्राम प्रधान इटायरा, प्रधानाचार्या, कम्पोजिट विद्यालय इटायरा, का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस कार्यक्रम मे आदित्य विक्रम, अमन बंसल, आरती तोमर, निदा, उबैद ,खुशी, शुभम, सुमित, आकांक्षा राय, शलोनी, हिमांशु, सौरभ, अनिल राजेश्वरी, तंजिल आदि छात्र-छात्राओं का सहयोग रहा। 

कार्यक्रम में श्रीमति संतरा, अर्चना, वीरवती, सोनू, सचिन, रजनी, सुनीता देवी, ,संगीता, कृष्णा, बंटी, अजय, शिवकुमार, कमलेश, रूकमणि, जूली, प्रवीण, बबीता आदि उपस्थित रहें।

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