शुकतीर्थ पहुंचे उत्तर कुमार, कविता जोशी व विकास बालियान एंड टीम



उत्तर कुमार की टीम पहुँची शुकतीर्थ शुकदेव आश्रम व हनुमंतद्धाम में किए भगवान के दर्शन


(काज़ी अमजद अली)


मुज़फ्फरनगर - देहाती फिल्मों के प्रसिद्ध हीरो उत्तर कुमार की टीम शनिवार को प्राचीन तीर्थस्थल शुकतीर्थ में पहुँची जहाँ उन्होंने मंदिरों में भगवान के दर्शन किये तथा  शुकदेव आश्रम में प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा की व संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा *किसान तेरी कौन सुनेगा* नामक गाने की शूटिंग की।

मुज़फ्फरनगर में शुकतीर्थ स्थित शुकदेव आश्रम पहुंचे उत्तर कुमार व नायिका कविता जोशी, विकास बालियान, मोनू धनगड, कन्हैया बघेल, शाहरूख खान, बिजेन्द्र सिंह, सचिन धनगड, पंकज तेजा, योगिन्द्र सहरावत ने शुकदेव आश्रम में शुकदेव मन्दिर के दर्शन किये तथा वट वृक्ष की परिक्रमा कर मनोकामना सिद्धि का धागा बांधा तथा शुकदेव आश्रम के महन्त स्वामी ओमानन्द जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामी ओमानन्द जी महाराज ने टीम के सदस्यों को ग्रन्थ व प्रसाद भेंट किया। टीम के सदस्यों ने हनुमद्धाम जाकर हनुमान जी की पूजा कर महामण्डलेश्वर स्वामी केशवानन्द सरस्वती जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामी जी ने टीम के सदस्यों को हनुमान चालीसा व प्रसाद भेंट किया। टीम के वरिष्ठ सदस्य विकास बालियान ने बताया कि गाज़ीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आन्दोलन से जुडे गाने *किसान तेरी कौन सुनेगा* की शूटिंग शुकतीर्थ में की गयी है इसके पूर्व हिट हो हो चुकी फ़िल्म ''अलझ पलझ "की शूटिंग भी मोरना, भोपा, शुकतीर्थ व सम्भलहेडा में की गयी थी। चार दिन पहले उत्तर कुमार की *पकड* फिल्म रिलीज हुई है, जिसे अब तक 1 करोड से अधिक लोग देख चुके हैं उत्तर कुमार का चेहरा देहाती फिल्मों के लिये एक परफेक्ट कलाकार के रूप में अपनी पहचान बना चुका है उत्तर कुमार का अभिनय अपने आप मे एक जिज्ञासा समेटे हुवे है यही कारण है कि दर्शक उनकी  अभिनीत फिल्मों की प्रतीक्षा करते हैं गम्भीर संवाद हो या कॉमिडी सीन उत्तर कुमार प्रत्येक किरदार को दक्षता से निभा रहें वहीं नायिका कविता जोशी की अदाकारी दर्शकों को भा रही है यही कारण है कि फ़िल्म के रिलीज़ होते ही दर्शकों का शानदार रेस्पॉन्स तुरन्त मिल रहा है ।

गाज़ीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को लेकर *किसान तेरी कौन सुनेगा* नामक गीत दर्शकों के बीच आने वाला है मार्मिक शब्दों की माला और शानदार संगीत दर्शकों के दिल को अवश्य ही भाएगा ।


राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र व हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मूल सँस्कृति को जीवटता प्रदान करने वाले उत्तर कुमार एक हीरो ही नही देहाती संस्कृति के वाहक भी हैं विदेशों तक अपनी संस्कृति को फिल्मों का रूप देकर प्रस्तुत करने का काम भी उत्तर कुमार बखूबी कर रहे हैं उत्तर कुमार का सहज अंदाज़ और भोली शक्ल उनके समर्पण का पता देती है देहाती संस्कृति की नाव के केवट रूपी खिवैय्ये का हम बारम्बार अपनी मुहब्बतों के साथ खैर मखदम करते रहेंगे ।









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