लॉक डाउन 3 अभी घर ही रहना है... राशिद कुरेशी

लॉक डाउन 3 अभी घर ही रहना है.....


मेने इस लॉक डाउन में कई उतार चढ़ाव देखें बीमारी की दहशत ने परिवार के प्रति प्रेम बढ़ाया,आपस मे ज्यादा वक्त बैठने से परिवार में एकता आई वो सुबह जो बहुत व्यस्त रहती थी ।अब वो ही सुबह पूरी तरफ़ से हमे आराम देने वाली है वो दोपहर जो काम मे कटती थी वो भरपूर नींद के साथ गुज़रती है। साथ मे खाना बेहद अच्छा लगा वो शाम जो बचपन के साथ चली गईं थी वो वापिस आई वो पतंगों को देखना साफ आसमान में दूर तक मेला और पुश्तेनी छतो पर एक अलग जमावड़ा वो शाम के बाद रात टीवी देखना,पड़ोस के लोगों से मज़बूत सम्बन्ध बनना क्या कभी सोचा था कि दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या कम होगी वो आज शून्य में है हम लॉक डाउन से ही महामारी को अपने पास आने से रोक पाए है कुछ कलम से लिखना भी अच्छा लगा 



 रात में पुराने गाने सुनना और
यूनियन के आंदोलन की पुरानी तस्वीरे सोशल मिडीया पर पोस्ट करना भी अच्छा लगा 


कुछ रिश्ते जो बेजान से थे उनमें मोहब्बत अपनापन की मिठास भरना अच्छा लगा लॉक डाउन ने सन्तुलित जीवन का एहसास कराया बेबस लोगों का दर्द भी विचलित करता था मजदूरों का मरना भी दुख देता था लेकिन बलिदान से ही देश चलता है ये लॉक डाउन वरदान है यही आखिर में साबित होता है



राशिद क़ुरैशी


भारतीय किसान यूनियन


मुज़फ्फरनगर


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