कहीं हम कलयुग के क्रूर चरण में तो नहीं  लौट रहे......

(कमल मित्तल)
लगता है हम कलयुग के उस क्रूर  चरण में जा रहे जहा मनुष्य अपनी समस्याओं से टकराता हुआ एक वैश्विक बीमारी की चपेट में आ गया है। मनुष्य अपने आप को भगवान से भी बड़ा मानकर भगवान के क्रोध का शिकार बनने की राह पर है । पूरी दुनिया में चाहे भगवान के मंदिर का द्वार हो या मस्जिद का गेट या गिरिजाघर का घंटा सभी जगह ताले लटके हुए हैं।कुछ ऐसा माहौल भारत हीं नहीं पूरी दुनिया में बना हुआ है ।हम बात कर रहे हैं उन परिस्थिति की जो पूरी दुनिया में एक वैश्विक महामारी कोरोना (कोविड-19 )के कारण उत्पन्न हुई है। 
आज दुनिया के सबसे विकसित देश अमेरिका, चीन हो या विकासशील देशों की श्रेणी में भारत सहित अन्य देश सभी विचलित दिखाई दे रहे हैं। एक ऐसी महामारी का प्रकोप जिसकी कल्पना करना भी खतरनाक है से सब डरे और सहमे हुए हैं ।जिस तरह बाबा, दादा कहानियां सुनाते थे की ऐसी महामारी आई थी कि शवों को ढोने वाला ( अंत्येष्टि करने वाला) भी मिलना मुश्किल हो जाता था ।एक शव को श्मशान घाट में ले जाते थे तो गांव में  दूसरा व्यक्ति मर जाता था। कुछ ऐसी परिस्थिति इटली, पाकिस्तान या अन्य देशों में दिखाई दे रही है शवो की अंत्येष्टि मशीनों से ही की जा रही है ।
अब सभी  देश एक ऐसी परिस्थिति में है कि जहां भौतिक सुख-सुविधाओं, मशीनीकरण, कंप्यूटरीकरण आदि  एडवांस टेक्नोलॉजी के चलते सब कुछ मनुष्य ने अपने हाथों में ले रखा है।
 कहते हैं प्रभु की लीला अपरंपार है जिसकी कोई थाह नहीं है। मनुष्य प्रभु के हाथों की कठपुतली है ।लेकिन भोग-विलासता  के कारण  मनुष्य ने ईश्वर को शून्य मानने की बहुत बड़ी गलती की है।  मनुष्य एक  मिनट में बता देता है कि कब बारिश होगी, कब ओले पड़ेंगे, कब गर्मी होगी। लेकिन इस बार कुछ अलग ही नजारा रहा। बहुत वर्षों बाद सर्दियों के मौसम में चोमासे जैसी स्थिति रही, और कुदरत ने पूरी दुनिया को ऐसे कैसे मुहाने पर ला खड़ा किया  जहां सभी देशों के वैज्ञानिक अचानक आई बिमारी की दवाई के लिए जूझते दिखाई दिए।
विश्व के अनेक देशों में इस बीमारी के चलते लोक डाउन किया गया, जिससे ऐसे हालात पैदा हो गए कि सुनसान सड़कों पर मनुष्य की जगह जंगलों में रहने वाले जंगली जानवर शहरी क्षेत्रों में आ गये।
सभी सरकारी सभी देशों की सरकारें जाएं इस बीमारी से लड़ने के लिए जूझ रही हैं वही सभी देशों की सरकारों  ने अपने देश के दानवीरों से मदद मांगी और महाभारत के राजा कर्ण की तरह दानवीरों  ने अपने खजाने जनता के लिए खोल दिए ,जिससे की कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। सरकारी दानवीरों से मिले इस खजाने को व्यवस्थित करने में  लगी हुई है।


 



लेखक वरिष्ठ पत्रकार व किसान चिंतक है।


Popular posts from this blog

गोरखपुर के कलक्टर विजय किरण आनंद व SSP पर NHRC में केस दर्ज

सिटी सेंटर में हुई लाखो की चोरी का खुलासा, महिला सहित 5 अरेस्ट, 31 मोबाइल व नकदी बरामद

चाऊमीन खिलाने के बहाने घर से बुलाकर ले गए युवक की दोस्तों ने ही सिर में गोली मारकर हत्या