ह्दय रोगी रोज दवा खाएं तनाव न लें


विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार दवा खाते रहने से काफी हद तक अपने को सुरक्षित रख सकते हैं ह्दय रोगी


संजय वर्मा
 मेरठ। लाकडाउन के दौरान घर में रहते-रहते तनाव हो जाना स्वाभाविक है। दिल के मरीजों के लिए यह दौर बहुत चुनौतीपूर्ण है। वह महीने भर से न अपने डाक्टर को दिखा पाए हैं न अपना ब्लड प्रेशर बीपी नपवा पाए हैं। विशेषज्ञों की यही राय है कि दिल के मरीज नियमित दवा खाते रहें और अपनी पुरानी दिनचर्या पर कायम रहें। इससे उन्हें नई परेशानी से दो-चार नहीं होना पड़ेगा।
कार्डियोलाजिस्ट डॉ. संजीव सक्सेना के मुताबिक, दिल के मरीज अपनी दवाएं लगातार खाते रहें। आसपास अगर बीपी की डिजिटल मशीन मिल जाए तो अपना बीपी नपवा लें। बीपी घटा या बढ़ा होने पर तनाव न लें। परेशानी होने पर अपने डॉक्टर से फ ोन पर संपर्क करें।
डॉ संजीव  के मुताबिक लाकडाउन-2 लागू होने पर लोग अलग-अलग वजहों से तनाव में हैं। दिल के 90 प्रतिशत मरीज भी तनाव के कारण परेशान हैं। वह नियमित दवा खाकर और अपने खानपान पर ध्यान रखकर बीपी को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बहुत परेशानी होने पर ही डॉक्टर को दिखाने निकलें। वर्ना फोन पर राय लेकर ही काम चलाएं।
दिल के मरीज ऐसे करें देखभाल
० डॉक्टर अतुल का कहना है कि हार्ट पेशंट्स के लिए इस वक्त सबसे जरूरी दो ही चीजें हैं। नंबर एक. आप लोग घर पर रहें यानी सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें। दूसरी बात आप टेंशन ना लें।
० जबसे ये संक्रमण हमारे देश में फैलना शुरू हुआ है, मेरे पास कई पेशंट्स के फ ोन आ चुके हैं कि सर खबरों में तो इस वायरस के बारे में जानकर डर लग रहा है। यह नॉर्मल लोगों के लिए इतना हानिकारक है तो हमारा क्या होगा।
० ऐसे में मैं हार्ट डिजीज के हर पेशंट से यही कहना चाहता हूं कि घर पर रहिए, फैमिली के साथ समय बिताइए और टेंशन फ्री रहिए। क्योंकि आप लोग अधिक टेंशन लेंगे तो कोरोना से कुछ हो ना हो हार्ट को जरूर समस्या हो सकती है।
० इसलिए सामान्य लोगों के साथ ही सभी हार्ट पेशंट अपना अतिरिक्त ध्यान रखें। लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। साथ ही लॉकडाउन के इस समय को फैमिली के साथ समय बिताकर यादगार बनाएं।
० जब आप परिवार के साथ होते हैं तो वर्क प्लेस और सोसायटी के दूसरे तनावों से मुक्त होते हैं। यह स्थिति आपके दिल की सेहत के लिए अच्छी होती है।
ऐसा होना चाहिए हार्ट पेशंट्स का शेड्यूल
० लॉकडाउन है तो इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि आप अपना रेग्युलर शेड्यूल डिस्टर्ब कर लें। अपनी दिनचर्या और सोने-जागने का समय वैसे ही रखेंए जैसे पहले था।
० खुद को रिलैक्स रखें और पूरी नींद लें। डायट प्रॉपर लें और दवाइयों को लेकर लापरवाही न बरतें। क्योंकि अगर आपका सोने-जागने का वक्त बदलता है तो खाने का वक्त भी बदल जाता है, ऐसे में दवाइयों का शेड्यूल भी डिस्टर्ब होता है।
० फिजिकली ऐक्टिव जरूर रहें। घर में वॉकए योग और कसरत का रुटीन बना लें। अगर पहले से आपका रुटीन है तो उसी समय पर उसे फॉलो करें। इससे आपकी बॉडी को अपनी बायॉलजिकल क्लॉक सेट रखने में मदद मिलेगी।