टीबी नहीं है लाइलाज, समय से लें दवा, कोर्स करें पूरा : सीएमओ

(रविता)
एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान 17 से
मेरठ, 10 फरवीर 2020। बचत भवन में जिला स्तरीय क्षय रोग टास्क फोर्स की बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राजकुमार ने कहा टीबी लाइलाज नहीं है, मर्ज को छिपाये नहीं। समय से दवा लें, कोर्स पूरा करें। उन्होंने बताया 17 फरवरी से दस दिनों के लिए टीबी के संबंध में एक्टिव केस फाईन्डिंग (एसीएफ) अभियान चलाया जायेगा।
डा. राजकुमार ने बताया जनपद में 13760 क्षयरोग के मरीज हैं। वर्ष 2018 में 6783 मरीजों को टीबी मुक्त किया गया। टीबी की साधारण बीमारी में 06 महीने के कोर्स से, ड्रग रजिस्टेन्ट (एमडीआर) टीबी  09 माह से 11 माह के कोर्स से व एक्सडीआर टीबी 18 माह से 20 माह के कोर्स से पूरी तरह से ठीक हो सकती है। मर्ज को छिपाना नहीं चाहिए बल्कि उसका इलाज कराना चाहिए। उन्होंने बताया प्रत्येक टीबी मरीज को सरकार की ओर से 500 रुपये पोषण भत्ता दिया जा रहा है।
      जिला क्षयरोग अधिकारी डा. एम.एस. फौजदार ने बताया जनपद में गत वर्ष 2019 में प्राइवेट अस्पतालों में 4450 व सरकारी चिकित्सालयों में 8610 मरीजों ने अपना इलाज कराया तथा इस वर्ष जनवरी से अब तक करीब 700 मरीज चिन्हित किये गये हैं। इस प्रकार जनपद में 13760 मरीज टीबी के हैं। उन्होंने बताया सरकारी चिकित्सालयों में टीबी के निःशुल्क उपचार व परीक्षण की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने बताया 17 फरवरी से दस दिनों के लिए टीबी के संबंध में एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान चलाया जायेगा, जिसमें कुल जनसंख्या के 10 प्रतिशत को टारगेट करते हुये संवेदनशील स्थानों पर अभियान चलाया जायेगा। इसके लिए 159 टीम गठित की गयी हैं। 34 सुपरवाइजर व 11 नोडल अधिकारी नियुक्त किये गये हैं। जनपद में वर्ष 2018 में 8093 टीबी के मरीज थे, जिनमें से 6783 को उपचार से टीबी से मुक्ति मिल गयी।
उन्होंने बताया जनपद में टीबी से मुक्ति के लिए ज्वाइन्ट एफअर्ट्र्स फार ऐलिमिनेशन आफ टयूबरक्लोसिस (जीत) प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। प्रत्येक टीबी के मरीज के बलगम के साथ-साथ एचआईवी, मधुमेह की जांच भी करायी जायेगी। उन्होंने कहा एमडीआर टीबी के मरीज को जांच के लिए ले जाते समय ट्रांसपोटेशन चार्ज भी दिया जायेगा। उन्होंने बताया 45 केन्द्रों पर टीबी की जांच करायी जा रही है तथा 06 आईटीटीसी पर भी जांच की व्यवस्था है।
इस अवसर पर नायब शहर काजी जैनुल राशिद्दीन ने कहा कि टीबी से मुक्ति के लिए व बचाव के लिए वह शाही मस्जिद सहित विभिन्न मजिस्दों से लोगों से अपील करेंगे।


     
 



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THANKS AND REGARDS


ASHISH KULSHRESTHA


DIVISIONAL COORDINATOR MEERUT AND SAHARANPUR


PH.NO-98999350500


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From: Meerut Division <meerut@cfar.org.in>
Date: Mon, 10 Feb 2020, 16:12
Subject: TB
To: Sanjay Verma <vsanjay166@gmail.com>


 


टीबी नहीं है लाइलाज, समय से लें दवा, कोर्स करें पूरा : सीएमओ
एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान 17 से
मेरठ, 10 फरवीर 2020। बचत भवन में जिला स्तरीय क्षय रोग टास्क फोर्स की बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राजकुमार ने कहा टीबी लाइलाज नहीं है, मर्ज को छिपाये नहीं। समय से दवा लें, कोर्स पूरा करें। उन्होंने बताया 17 फरवरी से दस दिनों के लिए टीबी के संबंध में एक्टिव केस फाईन्डिंग (एसीएफ) अभियान चलाया जायेगा।
डा. राजकुमार ने बताया जनपद में 13760 क्षयरोग के मरीज हैं। वर्ष 2018 में 6783 मरीजों को टीबी मुक्त किया गया। टीबी की साधारण बीमारी में 06 महीने के कोर्स से, ड्रग रजिस्टेन्ट (एमडीआर) टीबी  09 माह से 11 माह के कोर्स से व एक्सडीआर टीबी 18 माह से 20 माह के कोर्स से पूरी तरह से ठीक हो सकती है। मर्ज को छिपाना नहीं चाहिए बल्कि उसका इलाज कराना चाहिए। उन्होंने बताया प्रत्येक टीबी मरीज को सरकार की ओर से 500 रुपये पोषण भत्ता दिया जा रहा है।
      जिला क्षयरोग अधिकारी डा. एम.एस. फौजदार ने बताया जनपद में गत वर्ष 2019 में प्राइवेट अस्पतालों में 4450 व सरकारी चिकित्सालयों में 8610 मरीजों ने अपना इलाज कराया तथा इस वर्ष जनवरी से अब तक करीब 700 मरीज चिन्हित किये गये हैं। इस प्रकार जनपद में 13760 मरीज टीबी के हैं। उन्होंने बताया सरकारी चिकित्सालयों में टीबी के निःशुल्क उपचार व परीक्षण की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने बताया 17 फरवरी से दस दिनों के लिए टीबी के संबंध में एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान चलाया जायेगा, जिसमें कुल जनसंख्या के 10 प्रतिशत को टारगेट करते हुये संवेदनशील स्थानों पर अभियान चलाया जायेगा। इसके लिए 159 टीम गठित की गयी हैं। 34 सुपरवाइजर व 11 नोडल अधिकारी नियुक्त किये गये हैं। जनपद में वर्ष 2018 में 8093 टीबी के मरीज थे, जिनमें से 6783 को उपचार से टीबी से मुक्ति मिल गयी।
उन्होंने बताया जनपद में टीबी से मुक्ति के लिए ज्वाइन्ट एफअर्ट्र्स फार ऐलिमिनेशन आफ टयूबरक्लोसिस (जीत) प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। प्रत्येक टीबी के मरीज के बलगम के साथ-साथ एचआईवी, मधुमेह की जांच भी करायी जायेगी। उन्होंने कहा एमडीआर टीबी के मरीज को जांच के लिए ले जाते समय ट्रांसपोटेशन चार्ज भी दिया जायेगा। उन्होंने बताया 45 केन्द्रों पर टीबी की जांच करायी जा रही है तथा 06 आईटीटीसी पर भी जांच की व्यवस्था है।
इस अवसर पर नायब शहर काजी जैनुल राशिद्दीन ने कहा कि टीबी से मुक्ति के लिए व बचाव के लिए वह शाही मस्जिद सहित विभिन्न मजिस्दों से लोगों से अपील करेंगे।