एनीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जनपद में चलेगा अभियान

 


 


मुजफ्फरनगर।जनपद में एनीमिया (खून में हीमोग्लोबिन की कमी) एक प्रमुख जन स्वास्थ्य समस्या के रूप में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रही है। खासकर बच्चे और महिलाएं इस समस्या की शिकार हैं। इसीलिए एनीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए चार माह तक वृहदस्तर पर आईईसी (जानकारी, शिक्षा और संचार) अभियान चलाया जाएगा और विभाग की ओर से हर माध्यम से एनीमिया से ग्रसित लोगों के लिए बचाव एवं उपचार की सेवा दी जाएगी।  


जिला चिकित्सालय के रेड क्रॉस भवन में आयोजित बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. पीएस मिश्रा ने बताया एनीमिया मुक्त भारत अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में एनीमिया में सालाना 3 प्रतिशत की दर से कमी लाना है। इस अवसर पर उन्होंने सभी को निर्देश दिया कि अभियान को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करें। अभियान को सफल बनाने के लिए ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी व सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि सहयोग करेंगे। 


महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. अमिता गर्ग ने बताया इस अभियान में मुख्य रूप से शून्य से 19 वर्ष तक के बच्चे और गर्भवती व धात्री माताओं को शामिल किया गया है। पोषक तत्वों की कमी के कारण शरीर में खून की कमी हो जाती है जिसकी वजह से शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ता है और प्रतिरोधक क्षमता में भी कमी आ जाती है। किशोरियों में एनीमिया आगे जाकर गर्भावस्था को भी प्रभावित करता है। इस कमी को दूर करने के लिए स्कूल और आंगनबाड़ी केन्द्रों पर कार्यक्रम कर एनीमिया के प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही गर्भवती और स्तनपान करा रही महिलाओं के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कैंप आयोजित कर उन्हें जागरूक करेंगी। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में बच्चों को आयरन की गुलाबी या नीली गोली शिक्षकों की निगरानी में दी जाएंगी। 


उन्होंने बताया एनीमिया से सम्बंधित आंकड़ों (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे- 4) के अनुसार जनपद में 15 से 49 वर्ष की लगभग 66 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी से ग्रसित हैं। 6 से 59 माह के लगभग 53 प्रतिशत बच्चे और 15 से 49 वर्ष के लगभग 22 प्रतिशत पुरुष खून की कमी से जूझ रहे हैं।


 


लक्षण


·         थकान या कमजोरी अनुभव करना।


·         त्वचा, होठ, मसूड़ों, आंखों, नाखून और हथेलियों का पीला होना।


·         स्पष्ट सोचने में परेशानी या भ्रम अनुभव करना।


·         चक्कर आना या बेहोशी छाना।


·         हांफना या सीने में दर्द।


·         दिल की धड़कनों का तेज होना।


·         शिशुओं और बच्चों का धीमा विकास।


 


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