एड्स के प्रति लोगों को किया आगाह ,  स्कूल-कॉलेजों एवं बस स्टैण्ड पर अभियान चलाकर किया जागरूक

 


मुजफ्फरनगर। एड्स के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल-कॉलेजों एवं बस स्टैंण्ड पर शिविर लगाकर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। इसके तहत हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। । यहां लोगों को एड्स के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उसके बचाव के बारे में भी बताया गया। युवाओं को विशेष रूप से इस बीमारी के प्रति सचेत किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने समाज में एड्स मरीजों को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर कर जागरूकता लाने का आह्वान किया। उन्होंने एचआईवी संक्रमण के कारणों की जानकारी दी। शिविर में लोगों को बताया गया कि एचआईवी पॉजीटिव मरीजों की टीबी की जांच भी जरूरी है, जो सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क की जाती है।जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. योगेंद्र त्रिखा का कहना है कि जागरूकता ही इस बीमारी से बचाव का उपाय है। युवाओं को इसके प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। एड्स यानी एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है जो एक रोगी से दूसरे रोगी में फैलती है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता खत्म कर देती है। एचआईवी वायरस मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद कई सालों तक निष्क्रिय रहता है। हालांकि, इस दौरान वायरस शरीर के अंदर अपनी संख्या बढ़ाता रहता है और श्वेत रक्त कणिकाओं को नष्ट कर देता है। एचआईवी वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद भी 15-20 सालों तक मरीज स्वस्थ दिखता है, लेकिन उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा अनैतिक संबंधों की बाढ़ में यह बीमारी तेजी से फैल रही है। सिर्फ असुरक्षित यौन संबंधों से ही नहीं यह बीमारी संक्रमित खून या संक्रमित इंजेक्शन की वजह से भी फैलती है। उन्होंने कहा जनपद में अब तक 2.53 लाख महिलाओं की जांच कराई गई, जिनमें से 19 महिलाएं एचआईवी पॉजीटिव पाई गईं। उनका इलाज चल रहा है।मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. पीएस मिश्रा ने कहा - इस रोग के शिकार गरीब वर्ग के लोग ज्यादा होते हैं, जिसमें ट्रक-टैक्सी चालक, मलिन बस्तियों  में रहने वाले, भट्ठों पर काम करने वाले व अन्य मजदूर वर्ग शामिल हैं । इसलिए ऐसे इलाकों में जागरूकता की ज्यादा जरूरत है। इसके लिए समाज सेवियों एवं राजनीति से जुड़े  लोगों से आग्रह किया जाता है कि ऐसे लोगों में जागरूकता के लिए कार्यक्रम या अभियान चलाएं।