सुरक्षित गर्भ समापन विषय पर जनसमुदाय को जागरूक किया

(रविता)


मेरठ । मुख्य चिकित्सा अधिकारी सभागार में सुरक्षित गर्भ समापन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। आयोजन ग्रामीण समाज विकास केन्द्र संस्था और सॉझा प्रयास नेटवर्क के सहयोग से किया गया।
   मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा राजकुमार ने कार्यशाला में अपने सम्बोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष होने वाले कुल 31 लाख गर्भपात में से सिर्फ 11 प्रतिशत ही स्वास्थ्य केन्द्रों में होते हैं। प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सुरक्षित गर्भसमापन विषय की समस्त जानकारी समय-समय पर प्राप्त करते हुए उस जानकारी से अपने अधीनस्थ एवं जनसामान्य को जागरूक करें साथ ही साथ अपने ब्लॉक के समस्त एएनएम एवं आशाओं, आंगनवाडिय़ों को सुरक्षित गर्भसमापन की कानूनी जानकारी प्रदान करे, जिसके द्वारा जनसमुदाय के बीच भा्रंतियों को दूर कर उन्हें जागरूक किया जा सकें।
डा पूजा शर्मा, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, आरसीएच, ने कहा कि महिलाऐं जानकारी के अभाव में घरेलू नुख्सों एवं स्वयं मेडिकल स्टोर से दवा लेने के कारण गम्भीर जटिलताओं का सामना करना पड़ता हैं, इसलिए यह आवश्यक हैं कि सुरक्षित गर्भ समापन विषय पर विभिन्न माध्यमों से समय-समय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर जनसमुदाय को जागरूक किया जाये, जिससे जिन स्वास्थ्य केन्द्रों सुरक्षित गर्भसमापन की सेवाऐं देने के लिए सरकार द्वारा प्रशिक्षित चिकित्सक से सेवाऐं प्राप्त करें।
ग्रामीण समाज विकास केन्द्र के निदेशक ने साँझा प्रयास नेटवर्क के बारे में बताया कि यह नेटवर्क बिहार व उत्तरप्रदेश में 20 स्वयंसेवी संस्थाओं का समूह है जो कि महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य विशेषकर सुरक्षित गर्भसमापन सेवाओं को सुद्रढ़ करने व समुदाय में जागरुकता बढ़ाने का कार्य करता है।
सुश्री पारूल, आईपास डेवेल्पमेंट फाउंडेशन ने एमटीपी एक्ट के बारे में विस्तार में बताया। भारत में गर्भपात चार दशकों से अधिक समय से कानूनी है परन्तु गर्भपात सेवाएं आज भी सरलता से उपलब्ध नहीं हैं। इसके फलस्वरूप अनचाहा गर्भ धारण करने वाली महिलाओं को गर्भपात हेतु असुरक्षित तरीकों व अप्रशिक्षित प्रदाताओं की ओर रूख करना पड़ता है। प्रत्येक वर्ष भारत में अनुमानत: 1.56 करोड़ गर्भपात होते है जिसमे से लगभग दो तिहाई स्वास्थ्य संस्थाओं के बाहर होते हैं और हर 2 घंटे में असुरक्षित गर्भपात सम्बंधित कारणों से एक महिला की मृत्यु हो जातीहै।
सुश्री मरीना नोबुल, कार्यकर्ता, ग्रामीण समाज विकास केन्द्र ने फील्ड के अनुभव को सांझा किया और बताया कि समुदाय को, विशेषकर महिलाओं को कानूनन गर्भसमापन सेवाओं की जानकारी नहीं है साथ ही गर्भसमापन सेवाओं की ग्रामीण क्षेत्रों में कमी तथा गर्भसमापन को लेकर कई सारी भ्रांतिया है।इस अवसर पर एमओआईसी, बीसीपीएम, स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी, डाक्टर, स्वयंसेवी संस्थाएं आदि उपस्थित रहे।