ठंड पर भारी पड़ी आस्था, लगाई डुबकी

 


मथुरा में नदी का  एक किनारा जगमगा रहा था और दूसरा घनघोर अंधेर में डूबा हुआ। घाटों पर हजारों भाई बहन मां यमुना की छवि काे निहार रहे थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया की घड़ी के आने का इंतजार कर रहे थे। घड़ी की सुई ने वक्त की धारा को बदला और मैया यमुनाजी की जय-जय जयकार के घोष के साथ घाट गुंजायमान हो गए। हल्की ठंड थी, लेकिन विश्वास और अस्था के आगे ठंडक अपना कोई प्रभाव नहीं डाल पाई। बहन और भाई एक दूसरे का हाथ पकड़ कर यमुना के घाटों की सीढ़ियां नीचे उतर गए। मां को नमन किया। यमफांस से मुक्ति की कामना हृदय लिए में डुबकी लगाई। आधी रात से शुरू हुआ सिलसिला सूर्य किरणों के बिखरने तक चरम पर पहुंच गया। तब तक हजारों भाई बहन डुबकी लगाकर लौट चुके थे तो हजारों कदम यमुना की तरफ बढ़ रहे हैं। आज विश्रामघाट श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। भाई-बहनों ने स्नान के बाद धर्मराजजी और यमुना महारानी के मंदिर के दर्शन कर पूजा अर्चना की। भाई-बहनों की खुशी चेहरे पर साफ झलक रही थी। यमुना पार भी भाई-बहन स्नान सुबह स्नान कर रहे थे। स्नान के मद्देनजर  प्रशासन और नगर निगम से सभी व्यवस्थाएं की। श्रद्धालु गहरे पानी श्रद्धालुओं को जाने से रोकने के लिए बेरीकेडिंग लगाई है। पुलिस बल भी चौकन्ना बना हुआ है। निर्धारित मार्गाों से ही यातायात को डायवर्ट किया जा रहा है।


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