पटाखे चलाते समय 3 बातो का रखे ध्यान.... वरना

दीपावली पर कुछ सावधानियां बरती जाए तो स्वास्थ्य के लिये जरूरी है। मुज़फ्फरनगर के वरिष्ठ नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डा. एम0 के0 तनेजा ने बताया है कि ध्वनि जीवन दायनी (ओम) के साथ-साथ विध्वंस कारक भी होती है। दीपावली के पर्व पर पटाखे जलाते समय तीन बातो का विशेष ध्यान रखे। प्रथम सांस के रोगी रोशनी वाले पटाखो से दूर रहे वहीं बच्चो को आग के अतिरिक्त उनकी कान की नली पतली होने के कारण ऊंची अचानक आवाज से अधिक नुकसान (बहरापन तथा टिनिटस) हो सकता है। यही बात 60 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति मे क्योकि उसके सुनने की हड्डियां जमने लगती है। तथा काॅक्लिया का लचीलापन कम हो जाता है। फलस्वरूप सर्वाधिक कष्ट वरिष्ठ नागरिक को ही होता है, लडी बम से बार-बार आवाज तथा सुतली बम से 130 कठ से अधिक की ध्वनि अगर नजदीक से आती है तो काॅक्लिया को निश्चित रूप से नुकसान पहुॅंचाती है। अतः कान मे रूई लगाकर तथा सर और कान के ऊपर कपड़ा बांध कर पटाखे चलाये। जैसा कि प्रशासन के आदेशानुसार पटाखे 8ः00 बजे से 10ः00 बजे सांय तक चलाये जायेगे। 
 अतः उस समय बच्चे बूढे तथा गर्भवती महिला घर के अन्दर ही रहें। सबसे विशेष बात है कि कान मे भारी भारीपन, दर्द होने पर या अचानक कम सुनने पर कान मे कोई तेल, दवा इत्यादि ना डाले। कान मे होने वाली सांय सांय को शान्त मन से दोनों भवों के मध्य में मुस्कराकर शांत भाव से ध्यान करते हुए भ्रामरी (ओम) के दीर्घ उच्चारण से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। विद्धान व्यक्ति दूसरे से या विशेषज्ञ से पटाखे चलवा कर आनन्द ले सकता है।