एन्जाइना- दिल की नसों में ब्लाकेज........

एन्जाइना- दिल की नसों में ब्लाकेज-छाती में जकड़न क्यो?


डा0 अनुभव सिंघल (डी0एम0 काॅर्डियोलौजी, विभागाध्यक्ष, हृदय रोग, सुभारती मैडिकल सेंटर)


हमारा दिल जो कि छाती में बायीं तरफ एवं दोनों फेफडों के बीच स्थित होता है एक पम्प की भाँति हरदम पूरे शरीर में खून को प्रवाहित करता है। परन्तु दिल को भी नाॅनस्टाप काम करने के लिए ब्लड/ ...... की जरूरत होती है, जिसकी सप्लाई हृदय की तीन नसों (कोरोनरी आर्टरीज) द्वारा होती है-एक कोरोनरी आर्टरी (छलनी) दायी तरफ (राइट कोरोनरी-आर सी ए) एवं दो नसे (एल0ए0डी0 एवं एल0सी0 एक्स) बांयी तरफ के हृदय को खून की सप्लाई करती है।
इन नसों की अन्दर की दिवारे (इनर लाइनिंग) विभिन्न कारणों से क्षतिग्रस्त हो जाती है एवं डेमेज्ड धमनियों के अन्दर चर्बी इत्यादि का जमाव होने से, ये सप्लाई नलियां सकरी होने लगती है इस ब्लाॅकेज होने एवं बढ़ने की प्रक्रिया को एैथीरोस्कीलोसिस कहा जाता है। जब ये धमनिया सकरी हो जाती है तब ऐसे व्यक्ति कुछ भारी या मेहनत का काम जैसे तेजी से झपट कर, लम्बा चलने या जीने चढ़ने, वजन उठाकर चलने, खाना खाने के बाद या अधिक से चलने, टाॅयलेज में जोर लगाने या ज्यादा मानसिक तनाव/टेंशन होने पर छाती के बीच में जकड़न या भारीपन जो कि गले या जबडे की तरफ अथवा बांये हाथ की तरफ फैलती हुई प्रतीत होता है। कभी-कभी मरीज को गले में जलन या घुटन जैसी फीलिंग भी एक्जरशन लेने पर आती है। साथ ही साथ इस प्रकार का व्यक्ति जैसे ही वह भारी काम/मेहनत रोक कर या 2-3 मिनट आराम करना शुरू करता है यह जकड़न तुरन्त खत्म हो जाती है। इसे मैडिकल भाषा में एंजाइना दर्द कहा जाता है।
अब सवाल है एंजाइना होता क्यूं है?
भारी काम/मेहनत करते हुए शरीर की मांसपेशियों को अतिरिक्त खून की जरूरत होती है जिसे हमारा हार्ट तेज या ज्यादा बार धडक (पम्प) कर पूरा करता है, इसीलिए तेज भागने पर दिल की धड़कन बढ़ जाती है। परन्तु उस समय ज्यादा काम करने के लिए हृदय को भी कोरोनरी आर्टरीज से ज्यादा खून की सप्लाई चाहिए होती है, जिनमें संकरापन होने के कारण एक डिमांड सप्लाई मिसमैच हो जाता है एवं हृदय की बढ़ी जरूरत के हिसाब से खून की सप्लाई कम पड़ने लगती है जिससे दिल में दबाव होता है एवं वही जकड़न मरीज को छाती में बांयी तरफ गले, जबड़े एवं बायें हाथ में फैलता हुआ महसूस होने लगता है।
साथ ही साथ भारी काम रोकने/आराम करने पर क्योंकि दिल को ज्यादा धड़कने की जरूरत नहीं होती तो उसी प्रकार दिल को कम काम करने के लिए कम ब्लड की जरूरत होती है एवं डिमांड के हिसाब से फिस्सड सप्लाई सही पड़ने लगती है एवं मरीज को यह जकड़न/दर्द सही हो जाता है।
दिल की नसों में ब्लाकेज (सकरापन) को रोकने के लिए इन धमनियों की इनर लाइनिंग को क्षतिग्रस्त होने से रोकना होता है। कोरोनरी आर्टरीज की अन्दर की सतह विभिन्न कारणों जैसे तम्बाकू, पान-मसाले चबाने या इनका पेस्ट बनाना, चूने इत्यादि के साथ मुंह में रखने (कुबेर, नेवला, रजनी गन्धा इत्यादि), बीडी/सिगरेट पीने, लम्बे समय अधिक ब्लड़ प्रेशर बढ़ने, लम्बे समय बढ़ी शूगर होने, बहुत ज्यादा चर्बीयुक्त खानपान जैसे अंडे की जर्दी, मीट इत्यादि खाने, मानसिक तनाव, वजन बढ़ने (सिडेन्टरी लाइफ स्टाइल-तोंद निकलने) से होती है।
इसीलिए हार्ट की नसों में ब्लाॅकेज को रोकने हेतु धूम्रपान, तम्बाकू, अधिक चर्बी वाला खानपान बीपी शूगर को कन्ट्रोल करने की सलाह दी जाती है।
एजाइना से पीड़ित मरीज को गलत जीवन शैली छोड़कर कम चर्बी कम नमक वाले शाकाहार, एन्टी आॅक्सिडेन्टस/विटामिन मिनरल्स से भरपूर फलों / बादाम इत्यादि के सेवन एवं बीपी/शूगर को दवाओं से कन्ट्रोल रखना चाहिए।
खून पतला करने की दवा (एस्प्रिस) कोलेस्ट्रोल कंन्ट्रोल रखने की दवा (अैटोरवास्टेटिन इत्यादि) धडकन नियंत्रित की दवा जैसे मैटोप्रोलेल एवं दिल की नसों को फैलाकर रखने की दवाए (जैसे नाइट्रेट्स) से ज्यादातर मरीज आराम से एवं सुरक्षित रह सकते हैं जिन मरीजों को लाइफस्टाइल में बदलाव एवं उचित मात्रों में दवा लेने पर भी एंजाइना में आराम नहीं होता इन्हें दिल की धमनियों में ब्लाॅकेज की स्थिति एवं आगे के इलाज के लिए एन्ज्योग्राफी की सलाह दी जाती हैं।
(अगली बार-हार्ट अटैक क्या बला है)