UDO के बैनर तले मुशायरे का शानदार आगा़ज़, सुबह तक चलती रही अदब की महफिल



मुजफ्फरनगरः उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन मुजफ्फरनगर के तत्वावधान में एक शानदार मुशायरा गत रात्रि कुंगर पट्टी, सुजड़ू में आयोजित हुआ। जिसकी अध्यक्षता हाजी सलामत राही ने की और संचालन मास्टर अल्ताफ मशल ने किया। मुशायरा संयोजक मास्टर रईसुद्दीन राना के कुशल संयोजन में मुशायरा बेहद कामयाब रहा। मुशायरे की शमां मुशायरे के अध्यक्ष और संस्था के पदाधिकारियों द्वारा रोशन की गई। देर रात तक शायरों ने अपनी बेहतरीन शायरी सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सैकड़ों की संख्या में मौजूद गांव-शहर के गणमान्य व्यक्तियों, श्रोताओं व बच्चों ने शायरों को खूब दाद ओ तहसीन से नवाजा। 



इस अवसर पर उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन मुजफ्फरनगर के जिलाध्यक्ष कलीम त्यागी ने सभी शायरों और श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया और कहा कि मुशायरे उर्दू जबान के प्रचार व प्रसार का बेहतरीन ज़रिया हैं। मुशायरे के जरिए इंसान मनोरंजन के साथ साथ उर्दू जबान से परिचित भी होता है और इसकी सुंदरता से प्रभावित भी होता है। उन्होंने कहा उर्दू पूरी तरह से भारतीय और हमारी मातृभाषा है इसकी हिफाजत करना हमारी जिम्मेदारी है। हमारे बच्चे उर्दू लिपि से परीचित हों इसके लिए हमें पूरी कोशिश करनी चाहिये।





मुशायरे का आगाज डॉ० तनवीर गौहर की हम्द और तहसीन समर की नात ए पाक से हुआ। इसके बाद हाजी मौहम्मद अहमद ने मुल्क की शान में तराना पेश किया जिसे सभी ने बहुत सराहा।

खास शेर पाठकों के लिये पेश किए जाते हैं।

डॉ० तनवीर गौहर का अंदाज ए बयां- 

मसअले का हल निकाला जाएगा, शहर से पागल निकाला जाएगा

डोरे आंखों में उकेरे जाएंगे, रोके फिर काजल निकाला जाएगा

सलीम अहमद सलीम का कलाम-

तब्सिरा हुस्न पे यूँ ही नही करना आया, मैंने बरसों तेरे चेहरे की तिलावत की है

मौ० अहमद मुजफ्फरनगरी यूँ गोया हुए-

तुझे क्यों मुआफ़ कर दूं ये बता मुझे निगेहबां,  तेरे गुलसितां में होते मेरा आशियां जला है

अरशद जिया का कलाम-

कभी सूरत से तो सीरत का अंदाजा नहीं होता, यहां तो मोर को भी साँप खाता देखता हूँ मैं

नवेद अंजुम ने कुछ यूं कहा-

हमसे वो शख्श मुहब्बत की सनद मांगता है, जिसके हाथों से पिये ज़हर के प्याले हम ने

शाहजेब शरफ ने पढ़ा -

है आंधियों का बहुत ज़ोर जिस तरफ देखो,  हमें चराग़ जलाना है क्या किया जाए

अल्ताफ मशल ने कहा-

पुरख्तर राहों में बेखौफ मैं चलता रहा, माँ दुआ देती रही, खतरा जो था टलता रहा

सलामत राही ने पढ़ा-

राह की दुश्वारियों का कर न राही तू मलाल, हो न जब तक अज्म-ए-मोहकम मंजिलें मिलती नही।




तहसीन समर ने पढ़ा -

जुदाई अपने बच्चों की उसे बेहद सताती है, वो मुफलिस पेट की खातिर मगर घर छोड़ देता है

तहसीन कमर के शेर देखिए -

फल फूल और तायर कितने है, गुलशन में मनाज़िर कितने हैं।

खुर्रम सिद्दीकी ने कहा -

अज़्मे दिल के साथ ही रखिएगा निगाहे मोअतबर, तब गोहर मिल पाएगा गहराईयों के दरम्यिां

अंत में मुशायरा कन्वीनर रईसुद्दीन राना ने सभी का शुक्रिया अदा किया। मुशायरे में  उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन से असद फारूकी, बदज़्ज्मा खान, शमीम कस्सार, शहजाद अली, औसाफ अहमद, और गणमान्य व्यक्तियों में हाजी जफरयाब खान, इं० असद पाशा, मास्टर आबिद अली, मास्टर यासीन अहमद, मा० नदीम मलिक, सद्दाम अली राना, मौ० वसीम नदवी, डॉ० रिजवान, वसीम राना, नसीम राना, मौलाना फैसल, मुशीर राना, मारूफ राना, रिजवान राना, मो० अनस, मौ० फरहान, मौ० फिरोज, मेहेर त्यागी, फहीम अहमद, महरयाब राना, मो० युनुस और अमीर आजम आदि शामिल रहे।

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