वतन की खूबसूरत तस्वीर आपसी सौहार्द से ही: असद जमा एडवोकेट

वतन की खूबसूरत तस्वीर आपसी सौहार्द से है।


 


मुजफ्फरनगर से सिर्फ 100 किलोमीटर दूर दिल्ली प्रदेश दिल दुखाने वाले दंगे से दिल मे इंसानियत रखने वाला हर इंसान बहुत आहत है।


असद जमा 


पूर्व सभासद नगरपालिका


आज के युग में जहां शिक्षा पर जनता पूरी तरह से फोकस है वंही एक दूसरे पर हमला जान लेना स्कूल या किसी धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाना बहुत वीभस्त मानसिकता का परिचय होता है हम देशवासियों को आपस मे अमन सुकून से एक साथ मिलकर रहना चाहिए।हमारा ही मुल्क है हमें ही मजबूत करना है कोई भी मुद्दा जो हिंसा की तरफ लेकर चले उस मुद्दे से हमें दूर रखना चाहिए हमें याद रखना चाहिए 1947 में इस देश को लाखों लोगों की कुर्बानी के बाद आजादी मिली थी अब वक्त है।सम्प्रदायिक सौहार्द पर कार्य करने का एक दूसरे से गले लगने का बहुत जल्द रंगों का त्योहार होली आने वाला है उसके बाद ईद भी आएगी दोनों मिलन के उत्सव एक संदेश होंगे एक दूसरे से गले लगने का एक दूसरे को बधाई देने का मुझे पूरी आशा है कि वतन में जहां भी संप्रदायिक ताकतों ने थोड़ा बहुत भी खिंचाव करवाया है वह खिंचाव फिर से गले मिलकर ख़त्म होगा सबको जल्द एक होना चाहिए हैं।आज भी सैकड़ों ऐसे लोग नजरों में आए हैं जिन्होंने आगे बढ़ कर पीड़ितों की मदद की है उन्हें खाना शरण और हर तरह से मदद की है हम सोशल मीडिया पर पढ़ते हैं और हमने ऐसे लोग रूबरू भी देखा है सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा हम बुलबुले हैं इसके यह गुलसिता हमारा।।


एक ही ताने-बाने में रहने वाले लोग सुबह शाम एक दूसरे से जुड़े लोग कोई दोस्ती से कोई व्यापार से कोई पड़ोस से कोई दूर से आज वो सभी लोग आहत है।जो दिल्ली दिल वालों की है वह खून से लाल कैसे हो गई कौन गुनाहगार है किसको क्या सजा मिलेगी यह कानून अदालत जाने हमें तो अपने सभी दिल्ली वालों को यही संदेश देना है एक दूसरे से मिल कर रहे जीवन को सामान्य पटरी पर लाने के लिए पहल करें दिल्ली की हिंसा इंसानियत का कत्ल है और कोई भी धर्म कोई मज़हब।किसी भी किताब में नहीं लिखा कि हमें हिंसक होना चाहिए।इंद्र देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेश भाषा चाहे अनेक है।हम देश वासियों की ये खासियत है कि हम भारतवासी बुरी घटना को बहुत जल्द भूला कर एक दूसरे के प्रति दिलों में नरमाई लाकर एक दूसरे को गले लगा लेते हैं इसी प्रथा को आगे बढ़ाते हुए फिर से दिल्ली वालों को एक दूसरे से गले मिलना चाहिए  हिंसा ग्रस्त क्षेत्रों में एक दूसरे के प्रति अमन सकून के लिए मोहब्बत के लिए कार्य करना है और दुआ में याद रखना चाहिए एक दूसरे के बच्चों पर अपना अधिकार समझते हुए उनकी सुरक्षा के लिए आगे आना चाहिए कोई भी ऐसा काम नहीं होता जिस की माफी ना दी जा सके दिलों का बड़ा करके एक दूसरे के साथ उन्नति प्रगति के लिए आगे आना चाहिए उनका दर्दनाक लम्हों को भूल जाना चाहिए  ।अब फिर गगन में वही नारे लगने चाहिए हिंदुस्तान जिंदाबाद हिंदू मुस्लिम एकता जिंदाबाद हिंदू मुस्लिम भाई भाई सभी देशवासी दिल्ली को पहली की तरह मोहब्बत की राह में देखने के लिए बेहद आतुर है।