कुष्ठ रोग के प्रति लोगों को किया जाएगा जागरूक, ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण व संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन

(संजय वर्मा)
मेरठ। राष्ट्रीय राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद में चिकित्साधिकारियों द्वारा  महिला व पुरूष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तथा आशा कार्यकर्ताओं कत्र्ताओं को कुष्ठ रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिये ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण व संवेदीकरण किया जा रहा है।  उन्हें कुष्ठ रोग की पहचान व उससे मुक्ति  पाने के उपाय बताये जा रहे है ताकि कुष्ठ रोग को जड से समाप्त किया जा सके।
  दो चरणों में चलने वाले  प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत भावनपुर से की गयी है।जिला कुष्ठ अधिकारी डा विश्वास चौधरी एडा केसी तिवारी उप जिला कुष्ठ अधिकारी व वाईपीएस तोमर ने आशा व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देते हुए बताया कि कुष्ठ रोग अनुवांशिक नहीं है। कुष्ठ रोग मायको ब्ॉक्टरियम लेप्री नामक कुष्ठ जीवाणुओं से होने वाली बीमारी है। आमतौर पर 18 फीसदी लोगों में कुष्ठ  रोग से लडने की उत्तम रोग प्रतिरोधक शक्ति होती है। इसीलिये उन्हें कुष्ठ रोग नहीं होता है। कुष्ठ रोग के जीवाणुओं का शरीर में प्रवेश होने जाने के बाद अगर कुष्ठरोग प्रतिरोधिक शक्ति कम हो तो 3 से 5 साल में शरीर मे कही भी कुष्ठरोग के चिन्ह दिखाई दे सकते है। उन्होंने बताया 100 नए कुष्ठरोगियों में सिर्फ 10 से 15 रोगी ही संक्रामक होते है। उन्होंने बताया कुष्ठ रोग किसी को भी हो सकता है। कुष्ठ रोग की शुरूआत एक या अनेक दागों से हो सकती है। शरीर की त्वचा के रंग से फीका या लाल रंग का सपाट या उभरा हुआ दाग कुष्ठ रोग के लक्षण हो सकते है। उन्होंने बताया अधिकांश ऐसे दाग.चकत्ते पर सुन्नपन होता है। आकार या संख्या में धीरे-धीरे बढऩे वाले, फैलने वाले और कई दिन के दाग व चकत्ते को किसी हालत में अनदेखा न करें। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत आशा व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को बताया गया कि अगर इस प्रकार के लक्षण मरीजों में मिलते हैं तो है उन्हें उसके उपचार के उपाय बताये जाएं कि किस किस प्रकार से उनका निवारण हो सकता है। उन्हें यह भी बताया जाए कि इलाज न कराने पर यह  बीमारी अन्य लोगों को भी हो सकती है।