अब टीबी उन्मूलन पर फोकस टीबी से मुक्ति पाने के लिए बदला कार्यक्रम का नाम ,पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम का नाम बदल कर किया राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम

 


बुलंदशहर, 7 जनवरी 2020।  देश को वर्ष 2025 तक क्षय रोग से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। भारत सरकार ने लक्ष्य हासिल करने के लिये पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) के नाम को बदल कर इसका नाम राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी)  कर दिया है।


भारत सरकार के चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के विशेष सचिव संजीव कुमार ने हाल ही में सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को पत्र जारी करते  हुए इस बारे में सूचित किया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. केएन तिवारी ने बताया- सरकार के आदेश के बाद जनपद बुलंदशहर को वर्ष  2025 तक टीबी से मुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने एक बेहद सक्रिय कदम उठाया है, जिससे टीबी से मुक्ति मिल सके।


जिला क्षय रोग अधिकारी डा.  एमके गुप्ता ने बताया - राष्ट्रीय स्ट्रेटिजिक प्लान के अनुसार सन 2017 से 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित  किया गया है। इस कारण से  क्षय रोग मात्र नियंत्रण करने के लिये कार्यक्रम चलाया जा रहा था जिसको उन्मूलन के लक्ष्य प्राप्ति के मददेनजर जनवरी 2020 से राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम में परिवर्तित कर दिया गया है । यह  क्षय रोग उन्मूलन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। जिला क्षय रोग विभाग की ओर टीबी मरीजों को नि:शुल्क सुविधाएं  दी जा रही हैं। निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के मरीजों को इलाज के दौरान  प्रति माह 500 रूपये उनके खाते में डाले जाते है। जनपद में वर्तमान  में करीब 6810  टीबी मरीजों का सरकारी व 1991 मरीजों का प्राइवेट अस्पतालों में उपचार चल रहा है।


डा. गुप्ता ने बताया निक्षय योजना में पंजीकरण के लिये आधार कार्ड, निर्वाचन पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस (इनमें से कोई एक), खाते की पासबुक, टीबी जांच की रिपोर्ट, चिकित्सक की ओपीडी की जांच रिपोर्ट लाना आवश्यक है। अब तक कुल 5071 मरीजों के  खाते में 500 रुपए प्रति माह के हिसाब से धनराशि भेजी जा चुकी है।
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