आशा व ए एन एम करेगी छुटे बच्चो की पहचान

 


(Ravita)


मुजफ्फरनगर। समय-समय पर चलाए जाने वाले टीकाकरण टिटनेस-डिफ्थीरिया अभियान से वंचित बच्चों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्पेशल अभियान चलाया है। इसमें आशा, एएनएम को अपने एरिया में ऐसे छूटे हुए बच्चों की पहचान करने के लिए कहा है जो किसी कारण वश टीकाकरण से वंचित रह गए हों, विशेष तौर पर हाई रिस्क एरिया में, उनका इस विशेष अभियान में टीकाकरण किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. शरण सिंह ने बताया टीडी (टिटनेस-डिफ्थीरिया) टीका लगने से छूटे गए 7 वर्ष तक के बच्चों को टीका लगाया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरूकता कैंप भी लगाया गया। इसमें माता पिता को टीकाकरण की जानकारी दी गयी। उन्होंने कहा कि संक्रमण रोगों को ध्यान में रखते हुए हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे बच्चों को टीके लगवाएं जो किसी भी कारणवश टीकाकरण से छूट गए हों। इस अभियान के तहत मंगलवार तक 15 बच्चों को टीका लगाया गया। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर बच्चे के 6 सप्ताह पूरे होने पर पहली, 10 सप्ताह होने पर दूसरी और 14 सप्ताह होने पर तीसरी डोज दी जाती है। इसके बाद 16 से 24 माह पर प्रथम बूस्टर और 5 वर्ष पर दूसरी बूस्टर डोज दी जाती है। 10 वर्ष से 16 वर्ष की आयु में ये टीका लगाया जाता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी टीडी का टीका दिया जा रहा है। जिनको पहला टीका गर्भधारण करने के 3 माह पर एवं दूसरा टीका उसके एक माह बाद दिया जाता है।


मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. पीएस मिश्रा ने कहा कि जिले में एक भी बच्चा (टिटनेस-डिफ्थीरिया) टीकाकरण से वंचित न रहे, इसके लिए विभाग द्वारा हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।


डिफ्थीरिया -


डिफ्थीरिया को गलघोंटू नाम से भी जानाजाता है। यह कॉरीनेबैक्टेरियम डिफ्थीरिया बैक्टीरिया के इंफेक्शन से होताहै। इसके बैक्‍टीरिया टांसिल व श्वास नली को संक्रमित करता है। इसके कारण सांस लेने में रुकावट पैदा होतीहै। यह बीमारी बड़े लोगों कीतुलना में बच्‍चों को अधिक होती है। इस बीमारी के होने पर गला सूखने लगताहै, आवाज बदल जाती है, गले में जाल पड़ने के बाद सांस लेने में दिक्कत होती है। डिफ्थीरिया से संक्रमित बच्चे के संपर्क में आने पर अन्य बच्चों को भी इस बीमारी के होने का खतरा रहता है। इंफेक्‍शन से फैलने वाली यह बीमारी किसी भी आयुवर्ग को हो सकती है।


टिटनेस –


टिटनेस होने का कारण है 'क्लोसट्रिडियमटेटानी' नामक बैक्टीरिया है। यह बैक्टीरिया धूल गन्दगी और जंग लगी चीजों मेंपाया जाता है। शरीर में दर्द और मांसपेशियों में जकड़न, बार बार पेशाब आना इसका लक्षण है। टिटनेस से इन्फेक्टेड मरीज की हड्डियां और मांस पेशियां कमजोर हो जाती है। इस वजह से हड्डियों के फ्रैक्चर होने कीआशंका काफी बढ़ जाती है। टिटनेस के रोग का इलाज नहीं करने पर जबड़े भी जाम होने लगते हैं। दम घुटना टिटनेस की आखिरी स्टेज होती है।